-100 साल पुराना है खजाना, मां-बेटे की ईमानदारी देख कर्नाटक सरकार करेगी सम्मान बैंगलुरु,(ईएमएस)। कर्नाटक के गडग जिले के लक्कुंडी गांव में कक्षा 8वीं के छात्र ने अपनी ईमानदारी से पूरे देश का दिल जीत लिया है। गरीबी में जी रही विधवा मां के साथ घर बनाने के लिए जमीन खोदते समय उसे और उसकी मां को करीब 100 साल पुराना खजाना मिला। इसमें 466 ग्राम सोने के गहने और 634 ग्राम तांबे के प्राचीन अवशेष थे। खजाने में 22 सोने के गहने शामिल हैं। एक भारी सोने की माला, चूड़ियां, अंगूठियां, कंगन और अन्य जेवर के साथ में मोती, मूंगा, नीलम, क्रिस्टल और एक काला पत्थर भी मिला है। इतना खजाना देखकर भी छात्र प्रज्वल बसवराज रिट्टी की नीयत नहीं बिगड़ी और उसने सब कुछ सरकारी अधिकारियों को सौंप दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सीएम सिद्धारमैया और कानून मंत्री एचके पाटिल ने छात्र प्रज्वल की ईमानदारी की जमकर तारीफ की है। सीएम ने कहा कि प्रज्वल की ईमानदारी किसी भी खजाने से बड़ी है। ऐसी ईमानदार छात्र को सम्मान मिलना चाहिए। सरकार इस परिवार की मदद करेगी और उचित इनाम भी देगी। वहीं गग जिले के प्रभारी मंत्री पाटिल ने रिट्टी परिवार से मुलाकात की और कहा कि कैबिनेट में चर्चा कर परिवार को सम्मान और सहायता देने का फैसला लिया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक छात्र प्रज्वल और उसकी मां गंगव्वा गरीबी में जिंदगी गुजार रहे हैं। मां मजदूरी करती हैं और परिवार दादी के घर में रहता है। इस परिवार के पास थोड़ी सी जमीन है, जहां वे अपना छोटा सा घर बनाने की सोच रहे थे। यहां खुदाई शुरू हुई और करीब 5 फीट गहराई पर मजदूर का फावड़ा किसी धातु से टकराया। जब मिट्टी हटाई गई तो वहां एक मटका निकला, जिसमें सोने के चमकते गहने भरे थे। पास ही तांबे के अवशेष और कीमती पत्थर भी मिले। प्रज्वल ने तुरंत सारा सामान दादी के घर के पूजा कमरे में रखकर ताला लगा दिया। परिवार के साथ चर्चा करने के बाद उसने फैसला किया कि यह खजाना सरकार का है। प्रज्वल ने मंगलवार को खुद जिला अधिकारियों को यह सारा खजाना सौंप दिया। मां गंगव्वा ने अधिकारियों को बताया कि परिवार को आर्थिक मदद मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रज्वल के लिए सरकारी नौकरी और खुदाई वाली जमीन पर घर बनाने की अनुमति की मांग की। अभी निर्माण कार्य रुक गया है। सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि प्रज्वल जैसे बच्चों की ईमानदारी को प्रोत्साहन मिलना चाहिए। कानून के मुताबिक ऐसे खजाने का 20 फीसदी मूल्य उस व्यक्ति या परिवार को मिल सकता है, जिसने इसे खोजा और लौटाया है। सरकार जल्द ही कैबिनेट में इस पर चर्चा कर उचित इनाम और मदद का ऐलान करेगी। प्रज्वल अब गांव और जिले में हीरो बन चुका है। लोग उसकी ईमानदारी की मिसाल दे रहे हैं। यह घटना साबित करती है कि आज के दौर में भी ईमानदारी अभी भी बाकी है। प्रज्वल की इस घटना ने न सिर्फ उसके परिवार के लिए उम्मीद की किरण जगाई है, बल्कि पूरे समाज को एक संदेश भी दिया है। सिराज/ईएमएस 14जनवरी26