स्वदेशी हथियारों की गर्जना जो दुश्मन की नसों में भरती भय (भारतीय सेना दिवस -15 जनवरी पर विशेष) हमारा देश आज केवल भौगोलिक सीमाओं की रक्षा करने वाला राष्ट्र नहीं, बल्कि जल, नभ और धरा तीनों आयामों में संतुलित शक्ति का प्रदर्शन करने वाला एक सशक्त राष्ट्र बन चुका है। तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत ने युद्ध स्वरूप और पारंपरिक सीमाओं से आगे निकलकर साइबर, अंतरिक्ष और ड्रोन युद्ध में महारत हाशिल कर ली है। भारत ने अपने सैन्य सिद्धांत को “संयम के साथ सामर्थ्य” के सूत्र में ढाला है। यही कारण है कि भारत शांति का पक्षधर रहते हुए भी दुश्मन की प्रत्येक चुनौती का उत्तर देने में सक्षम और निर्णायक दिखाई देता है, जो किसी को छेड़ता नहीं और छेड़े तो छोड़ता नहीं, घर में घुसकर मारता है। भारतीयों की सुरक्षा देश की सर्वोपरि प्राथमिकता है, इसलिए देश की थलसेना, नौसेना और वायुसेना तीनों के बीच समन्वय अब केवल अभ्यास नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता बन चुका है। सीमाओं पर आधुनिक निगरानी प्रणालियाँ, नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली, रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग और सटीक प्रहार क्षमता ने भारत की प्रतिरोधक शक्ति को कई गुना बढ़ाया है। पर्वतीय क्षेत्रों में त्वरित तैनाती, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वायु-आधारित त्वरित प्रतिक्रिया द्वारा तीनों मोर्चों पर भारत की तैयारी स्पष्ट संदेश देती है कि किसी भी दुस्साहस का उत्तर तत्काल और प्रभावी होगा। भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा केवल हथियारों से नहीं, बल्कि नीति, कूटनीति और जन-विश्वास से भी सुदृढ़ होती है। भारत ने हाल के वर्षों में सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ रक्षा ढाँचे में सुधार, संयुक्त कमान की दिशा में पहल और मित्र देशों के साथ रणनीतिक सहयोग को बढ़ाया है। आतंकवाद, सीमापार घुसपैठ और समुद्री डकैती जैसे खतरों के प्रति “शून्य सहनशीलता” की नीति ने भारत की सुरक्षा-विश्वसनीयता को मजबूत किया है। यह स्पष्ट है कि भारत युद्ध नहीं चाहता, पर यदि युद्ध थोपा गया, तो उसका उत्तर निर्णायक होगा। जिसका तत्कालीक उदाहरण ऑपरेशन सिंदूर है, जिसमें पाकिस्तान द्वारा देश के कई शहरों को लक्ष्यं बनाया गया, लेकिन हमारे सैनिकों और सैन्य प्रणालियों की क्षमता ने उसके नापाक मंसूबों पर पानी फेर दिया। भारत की सैन्य शक्ति का सबसे बड़ा आधार उसकी स्वदेशी रक्षा तकनीक है। डीआरडीओ के नेतृत्व में विकसित अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें, ब्रह्मोस एयरोस्पेस की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल, स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित ध्रुव हेलिकॉप्टर, आधुनिक आकाश वायु-रक्षा प्रणाली और स्वदेशी अरिहंत श्रेणी की परमाणु पनडुब्बी बनाई गई हैं। ये सभी भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता के सशक्त उदाहरण हैं। इसके साथ ही, मेक-इन-इंडिया पहल के अंतर्गत ड्रोन, रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और उन्नत तोपखाने का स्वदेशी निर्माण भारत को तकनीकी निर्भरता से मुक्त कर रहा है। हमारे सैनिकों का शौर्य केवल हथियारों से नहीं, बल्कि राष्ट्र के विश्वास से जन्म लेता है। सीमाओं पर तैनात जवान जब यह जानते हैं कि देश उनके साथ खड़ा है और उनकी सुरक्षा के लिए उन्नत तकनीक, राष्ट्रीय नीति और संसाधन उपलब्ध हैं, तब उनका मनोबल अडिग रहता है। यही मनोबल भारत की वास्तविक शक्ति है। जल में नौसेना की चौकसी, नभ में वायुसेना की सतत गश्त और धरा पर थलसेना की अडिग उपस्थिति एक संकल्प के साथ त्रिआयामी सजगता राष्ट्र को सुरक्षित रखती है। भारतीय शौर्य की दहाड़ आक्रामकता का नहीं, सक्षम संयम का प्रतीक है, जिसका स्पष्ट संदेश है कि भारत शांति चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता, नागरिकों की सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं कर सकता। जल, नभ और धरा पर भारत का महाशौर्य केवल राष्ट्रीय पर्वों पर केवल दिखाई नहीं देता, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर निर्णायक रूप से प्रकट भी होता है। (लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।) (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 14 जनवरी /2026