-खुफिया एजेंसियां ऐसे संकेतों को मान रहीं गंभीर, अलर्ट भी कर रहीं जारी बहावलपुर,(ईएमएस)। क्या लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद अब एक साथ आ चुके हैं? क्या ये मिलकर भारत के खिलाफ किसी बड़े आतंकी हमले की साजिश रच रहे हैं? भारतीय खुफिया एजेंसियां ऐसे सवालों के जवाब तलाशने में जुटी हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लश्कर और जैश दोनों के आतंकी संगठनों के मुख्य ठिकानों को भारतीय सेना ने तबाह कर दिया था। इसके बावजूद, लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष आतंकियों की एक अहम बैठक बहावलपुर में की जिसमें लश्कर के कई बड़े आतंकी जैसे हाफिज सईद का बेटा तल्हा सईद, लश्कर का डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी और हाफिज अब्दुल रऊफ मौजूद था। सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को ये सभी आतंकी बहावलपुर के एक बड़े मदरसे में इकट्ठा हुए। बैठक जैश के मुख्यालय मरकज सुभानअल्लाह से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर हुई। खुफिया सूत्रों का कहना है कि लश्कर के आतंकियों की जैश के आतंकियों से मुलाकात भी हुई, हालांकि इस बैठक की तस्वीरें अब तक सामने नहीं आई हैं। दोनों आतंकी संगठनों ने पहले भी भारत में आतंकी हमले किए हैं, इनमें लश्कर का 2008 का मुंबई हमला और जैश का 2001 का भारतीय संसद हमला जैसी घटनाएं दोनों के खौफनाक इतिहास का हिस्सा हैं। इसलिए खुफिया एजेंसियां ऐसे संकेतों को गंभीरता से ले रही हैं और अलर्ट जारी कर रही हैं ताकि किसी संभावित हमले को रोका जा सके। 2025 में भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के कई ठिकानों को निशाना बनाया। इस ऑपरेशन में दोनों संगठनों के ठिकानों में काफी हद तक तबाही हुई और कई बड़े आतंकी मारे गए, लेकिन इसके बाद भी दोनों समूहों के अवशेष बाकी रहे। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक ऑपरेशन के बाद दोनों संगठन अपने नेटवर्क को फिर से खड़ा करने, बेहतर संगठनात्मक संरचना और लॉजिस्टिक सपोर्ट जुटाने की कोशिश में हैं। सिराज/ईएमएस 14जनवरी26