अंतर्राष्ट्रीय
14-Jan-2026


कोपेनहेगन,(ईएमएस)। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच बढ़ते तनाव के मध्य ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उन्हें अमेरिका और डेनमार्क में से किसी एक को चुनना पड़ा, तो वे डेनमार्क के साथ रहना पसंद करेंगे। नीलसन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की बात कर रहे हैं। नीलसन ने यह टिप्पणी 13 जनवरी को डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन के साथ आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में की थी। यह बयान अमेरिकी संसद में ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने से जुड़े एक विवादास्पद बिल के पेश होने के बाद पहला आधिकारिक प्रतिक्रिया माना जा रहा है। दरअसल अमेरिकी संसद में 12 जनवरी को ‘ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट’ नाम का बिल पेश किया गया था। इस बिल का उद्देश्य ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करना और बाद में उसे अमेरिकी राज्य का दर्जा देना है। यदि यह बिल पास हो जाता है, तो ग्रीनलैंड अमेरिका का 51वां राज्य बन सकता है। नीलसन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, “मैं उन्हें नहीं जानता और मैं उनकी बात से सहमत नहीं हूं। यह उनके लिए एक बड़ी समस्या बन सकता है।” ट्रम्प की इस टिप्पणी ने मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि डेनिश कॉमनवेल्थ का हिस्सा होने के नाते ग्रीनलैंड नाटो का सदस्य है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी नाटो की ही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा किसी एक देश के दबाव या धमकी से तय नहीं की जा सकती। ड्रेनमार्क ने जताई चिंता डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने अमेरिका के रुख पर चिंता जताते हुए कहा कि अपने सबसे करीबी सहयोगी से इस तरह का दबाव झेलना आसान नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि ग्रीनलैंड के लिए आने वाला समय सबसे चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फ्रेडरिकसेन ने साफ कहा कि यदि ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह का हमला हुआ, तो इससे ट्रांस-अटलांटिक डिफेंस एग्रीमेंट यानी नाटो को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीनलैंड पिछले करीब 300 वर्षों से डेनमार्क का हिस्सा रहा है। चूंकि डेनमार्क नाटो का सदस्य है, ऐसे में ग्रीनलैंड पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को अमेरिका और यूरोप के बीच हुए रक्षा समझौतों के उल्लंघन के रूप में देखा जाएगा। विशेषज्ञों की मानें तो ग्रीनलैंड को लेकर यह विवाद केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि भविष्य में अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के संबंधों की दिशा तय करने वाला मुद्दा बन सकता है। हिदायत/ईएमएस 14जनवरी26