15-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। विश्व पुस्तक मेले के पांचवें दिन पोलैंड के राजदूत ने भारत से विभाजन और धर्मनिरपेक्षता पर संवाद किया। कैलाश सत्यार्थी ने युवाओं को करुणा का 3डी मंत्र दिया, जिसमें सहानुभूति, जिम्मेदारी और सम्मान शामिल हैं। सचिन कुमार जैन की पुस्तक का विमोचन हुआ, और सत्यार्थी की बेस्टसेलर किताबों पर चर्चा हुई। फेस्टिवल ऑफ फेस्टिवल्स 3.0 में विभिन्न साहित्यिक उत्सवों ने भारतीय साहित्य को बढ़ावा दिया। भारत मंडपम में चल रहे 53वें विश्व पुस्तक मेले के पांचवें दिन का शुभारंभ अंतरराष्ट्रीय फोकस के साथ हुआ, विदेशी मंडप में साहित्य, कूटनीति व पुस्तकों के भविष्य पर वैचारिक सत्रों का आयोजन हुआ। बुधवार का एक अन्य आकर्षण पोलैंड के राजदूत एचई पियोटर स्विटाल्स्की के साथ बुक्स एंड लिटरेचर पर एक संवाद था। राजदूत ने कहा कि भारत की ही तरह पोलैंड को भी विभाजन का दंश झेलना पड़ा है। यह दोनों देशों की साहित्यिक परंपराओं की ताकत थी कि उन्होंने अपनी धर्मनिरपेक्ष पहचान को जीवित रखा। उन्होंने दो राष्ट्रों और राज्य के गठन के संबंध में उनके साझा ऐतिहासिक और सामाजिक इतिहास के बीच एक कड़ी के रूप में रबींद्रनाथ टैगोर के लेखन की भी बात की। जैन की पुस्तक नागरिक आंदोलनों के सफर को दर्शाती है, जो समाज को प्रेरित करती है। इसके अलावा नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी की बेस्टसेलर पुस्तकों—सपनों की उड़ान, आजाद बचपन की ओर, बदलाव के बोल, सभ्यता का संकट और समाधान—पर गहन चर्चा हुई। इन किताबों ने बाल अधिकार, शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन पर प्रकाश डाला। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/15/ जनवरी /2026