बस्ती (ईएमएस)। योग के अष्टांग मार्ग में प्राणायाम को चौथा अंग बताया गया है। प्राणायाम ‘प्राण’ और ‘आयाम’ दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसमें प्राण का अर्थ वायु तथा आयाम का अर्थ रोकना है। अर्थात् श्वास-प्रश्वास की नियंत्रित प्रक्रिया को ही प्राणायाम कहा जाता है। यह न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक उन्नति का सशक्त साधन है। डॉ. नवीन सिंह, योगाचार्य, पतंजलि योग पीठ हरिद्वार (यूनिट बस्ती) ने बताया कि चारों वेदों एवं ब्राह्मण ग्रंथों में प्राण को वायु के रूप में वर्णित किया गया है। प्राण एवं अपान वायु के संयम को ही प्राणायाम कहते हैं। जैसे भट्टी में तपाने से धातुओं के मल नष्ट हो जाते हैं, उसी प्रकार प्राणायाम से इंद्रियों के दोष समाप्त हो जाते हैं। योगदर्शन में वर्णित पांच क्लेश—अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष एवं अभिनिवेश—प्राणायाम के नियमित अभ्यास से क्षीण हो जाते हैं। महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र में कहा है— “ततः क्षीयते प्रकाशावरणम्”, अर्थात् प्राणायाम से ज्ञान के ऊपर पड़ा अज्ञान रूपी आवरण नष्ट हो जाता है और विवेक व वैराग्य का उदय होता है। महर्षि पतंजलि के अनुसार प्राणायाम के चार प्रकार हैं— बाह्य प्राणायाम : श्वास को बाहर निकाल कर बाहर ही रोकना। आभ्यंतर प्राणायाम : श्वास को भीतर लेकर भीतर ही रोकना। स्तम्भवृत्ति प्राणायाम : श्वास को जहाँ का तहाँ रोक देना। बाह्याभ्यंतर विषयाक्षेपी प्राणायाम : बाह्य व आभ्यंतर प्राणायाम का संयुक्त अभ्यास। डॉ. सिंह ने प्राणायाम के लिए आवश्यक निर्देश देते हुए बताया कि इसका अभ्यास खाली पेट एवं शौच के उपरांत प्रातःकाल करना सर्वोत्तम है। स्नान के बाद, ढीले वस्त्र पहनकर, शुद्ध एवं हवादार स्थान पर नासिका से श्वास लेते-छोड़ते हुए प्राणायाम करना चाहिए। साथ ही व्यक्ति को अपनी आयु व शारीरिक क्षमता के अनुसार अभ्यास करना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्राणायाम के समय ईश्वर का ध्यान अत्यंत लाभकारी है। मस्तक, भ्रूमध्य, हृदय या नाभि में मन को एकाग्र कर ओम्, गायत्री मंत्र अथवा वेद वाक्यों का जप करते हुए प्रभु से दुःखों के निवारण एवं सद्गुणों की प्राप्ति की प्रार्थना करनी चाहिए। डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि चारों प्रकार के प्राणायामों के विषय में विस्तृत जानकारी क्रमशः दी जाएगी। उन्होंने आम जनमानस से अपील की कि वे प्राणायाम को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाकर स्वस्थ, संतुलित एवं आध्यात्मिक जीवन की ओर अग्रसर हों। 16 जनवरी, 2026