अमेरिका-इजरायल की साइबर कंपनियों के साफ्टवेयर का उपयोग बैन बीजिंग(ईएमएस)। चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए अपने देश की कंपनियों को अमेरिका और इजरायल की साइबर सुरक्षा कंपनियों का सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने से रोकने का निर्देश दिया है। इस फैसले से अमेरिका की कई बड़ी साइबर सिक्योरिटी कंपनियां प्रभावित हुई हैं, जिनमें वीएमवेयर (ब्रॉडकॉम के स्वामित्व वाली), फोर्टिनेट, क्राउडस्ट्राइक, सेंटिनलवन, मैनडियंट, पालो ऑल्टो नेटवक्र्स और रैपिड7 शामिल हैं। इसके अलावा इजरायल की चेक पॉइंट सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी भी इस लिस्ट में है। चीन का संशोधित साइबर सिक्योरिटी लॉ 1 जनवरी 2026 से लागू हो गया है। इसे विदेशी तकनीक के खिलाफ बीजिंग की अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई माना जा रहा है। नए कानून में जुर्माने की राशि कई गुना बढ़ा दी गई है और पहले चेतावनी देने की शर्त भी हटा दी गई है। अब बिना मंजूरी वाला विदेशी सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करना सिर्फ तकनीकी फैसला नहीं, बल्कि भारी कानूनी और आर्थिक जोखिम बन गया है। जांच में सामने आया है कि नए कानून के तहत चीन विदेशी तकनीक को व्यवस्थित तरीके से अपने सिस्टम से बाहर कर रहा है। संशोधित आर्टिकल 23 के तहत अब हर साइबर सिक्योरिटी प्रोडक्ट को चीन सरकार की ओर से कराई जाने वाली सख्त जांच से गुजरना होगा। जब तक किसी सॉफ्टवेयर को सरकारी सर्टिफिकेशन नहीं मिलता, उसे चीन के बाजार में बेचा या इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। भारी जुर्माना, कंपनियों पर दबाव ऐसे अनसर्टिफाइड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल जारी रखने वाली कंपनियों पर आर्टिकल 62 के तहत 1 करोड़ युआन (करीब 14 लाख डॉलर) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसका मतलब साफ है कि चीन में काम कर रही किसी भी घरेलू कंपनी के लिए विदेशी सॉफ्टवेयर रखना अब बेहद महंगा सौदा बन गया है। ग्लोबल साइबर इंडस्ट्री पर असर इन संशोधनों का सीधा असर दुनिया की बड़ी साइबर सिक्योरिटी कंपनियों पर पड़ेगा। अगर अमेरिकी या इजरायल की कंपनियां सरकारी जांच में फेल होती हैं तो न सिर्फ उनके प्रोडक्ट बैन हो सकते हैं, बल्कि उनके चीनी क्लाइंट्स को भी भारी जुर्माना झेलना पड़ सकता है। नए कानून के तहत चीन ने अपनी डिजिटल सीमाएं और मजबूत कर दी हैं। आर्टिकल 35 के अनुसार, क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेटर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे जो भी नेटवर्क या डिजिटल प्रोडक्ट इस्तेमाल कर रहे हैं, वो राष्ट्रीय सुरक्षा जांच में पास हो। आर्टिकल 37 के तहत चीन में इक_ा होने वाला सारा डेटा देश के अंदर ही रखना अनिवार्य कर दिया गया है। ये नियम खास तौर पर क्लाउड-आधारित कंपनियों के लिए मुश्किल खड़ा करता है। विनोद उपाध्याय / 16 जनवरी, 2026