मुंबई-नागपुर-पुणे में बढ़त; लातूर में कांग्रेस ने 70 में से 43 सीटें जीतीं, 45 साल में पहली बार... मुंबई पर भाजपा की बादशाहत, मालेगांव में ओवैसी किंगमेकर ‘महाराष्ट्र’ में विपक्ष साफ! मुंबई(ईएमएस)। महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव में भाजपा गठबंधन एकतरफा जीत की ओर है। रुझानों में 29 नगर निगमों में से 23 में भाजपा गठबंधन को बढ़त है। मुंबई के बृहन्मुंबई नगर निगम में भाजपा+शिवसेना (शिंदे) अलायंस कुल 227 सीटों में से 115 सीटों पर आगे चल रहा है। इसके अलावा नागपुर, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, पिंपरी चिंचवाड और नासिक में भी भाजपा गठबंधन को बढ़त है। लातूर में कांग्रेस ने जीत हासिल की है। 70 में से 43 सीटें जीतीं। चंद्रपुर में भी कांग्रेस लीड कर रही है। परभणी नगर निगम में शिवसेना (उद्धव) को बढ़त है। वसई विरार में बहुजन विकास अगाड़ी और मालेगांव में शिवसेना (शिंदे) आगे चल रही है। मालेगांव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम किंगमेकर की स्थिति में है। यहां की कुल 84 सीटों में ओवैसी की पार्टी 20 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। शिवसेना शिंदे 18, सपा 6 और भाजपा 2, अन्य 35 सीटों पर आगे चल रही है। महाराष्ट्र में बीएमसी सहित 29 नगर महापालिका के लिए हुए चुनाव में भाजपा गठबंधन ने विपक्ष का पूरी तरह सफाया कर दिया। राज्य के 29 में 23 नगर निगमों में भाजपा गठबंधन आगे है। मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक में गठबंधन को बड़ी बढ़त हासिल है। भाजपा ने मुंबई पर पूरी तरह से अपना कब्जा जमा लिया है और 45 साल में पहली बार बीएमसी में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। प्रदेश के सभी निगमों में सबसे अहम बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) है। बीएमसी की 227 सीटों में से भाजपा गठबंधन को 118 सीटें मिलती दिख रही है। भाजपा उम्मीदवार फिलहाल 90 सीटें और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 28 सीटों पर बढ़त है। इस तरह मुंबई पूरी तरह भगवामय होता दिख रहा है। बीएमसी चुनाव में भाजपा ने जीत का परचम लहरा दिया है। भाजपा पहली बार मुंबई में अपना मेयर बनाने की स्थिति में पहुंच गई है। बीएमएसी के इतिहास में अभी तक भाजपा का कोई नेता मेयर नहीं बना सका है। भाजपा ने अपने गठन के 45 साल के बाद जाकर मुंबई में मेयर बनाने की पॉजिशन हासिल कर ली है। बीएमसी में भाजपा गठबंधन को बहुमत बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) की 227 सीटें हैं। मेयर के बहुमत का आंकड़ा 114 का होता है। अभी तक के रुझानों के लिहाज से भाजपा को 90 सीटें और शिंदे की शिवसेना को 28 सीटों पर बढ़त है या फिर जीत मिल चुकी है। इस तरह महायुति को 118 सीटों मिलती दिख रही है। ऐसे में भाजपा के खेमे में खुशी का माहौल है। वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को 63 सीटों पर बढ़त है या फिर जीत दर्ज कर चुकी है। कांग्रेस 12 सीट पर आगे है तो मनसे के 6 उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। इसके अलावा अजित पवार की एनसीपी एक सीट और अन्य पार्टी के उम्मीदवार 9 सीट पर आगे हैं। इसके चलते भाजपा आसानी से अपना मेयर मुंबई में बना सकती है। 45 साल के बाद भाजपा का मुंबई पर कब्जा भारतीय जनता पार्टी का गठन 1980 में हुआ है। इस तरह 45 साल के बाद पहली बार मुंबई के बीएमसी चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। बीएमसी में भाजपा का जलवा दिख रहा है। ऐसे में भाजपा मुंबई में अपनी सरकार बनाने की स्थिति में खड़ी नजर आ रही है। भाजपा मुंबई में पहली बार अपना मेयर बनाने की पोॉजिशन में पहुंच गई है। पिछली बार 2017 में हुए बीएमसी चुनाव में भाजपा ने 82 सीटें जीती थी और शिवसेना को 84 सीटें मिली थीं। हालांकि, महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार होने के चलते भाजपा ने शिवसेना को समर्थन कर दिया था, लेकिन इस बार सियासी बाजी पलट दी। मुंबई के बीएमसी चुनाव में भाजपा ने शिंदे की पार्टी शिवसेना साथ मिलकर चुनाव लड़ा और ठाकरे ब्रदर्स की जोड़ी को सियासी धूल चटा दी। भाजपा ने 2017 के बीएमसी चुनाव से 8 सीटें ज्यादा जीतती दिख रही है जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को 19 सीटें कम मिलती दिख रही। इतना ही नहीं उद्धव विपक्ष के साथ मिलकर भी अपना मेयर बनाने की स्थिति में नहीं है और भाजपा की स्थिति साफ हो गई है। लॉटरी सिस्टम से तय होगा मुंबई का मेयर बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी)का मेयर किस कैटेगरी का होगा इसे लॉटरी सिस्टम से तय किया जाएगा। जैसे यह सीट महिला, ओबीसी या एससी होगी या ओपन रहेगी इसका फैसला चुनाव आयोग लाटरी सिस्टम के माध्यम से करेगा। महाराष्ट्र के मुंबई को आखिरकार चार साल बाद मेयर मिलने जा रहा है। मुंबई के मेयर का पद संभालने वाली आखिरी शख्स शिवसेना की किशोरी पेडनेकर थीं, जिन्होंने 22 नवंबर, 2019 से 8 मार्च, 2022 तक यह पद संभाला था, हालांकि, तब शिवसेना उद्धव और शिंदे के बीच बंटी नहीं थी। लेकिन अब शिवेसना दो धड़ों में बट चुकी है और शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भाजपा के साथ मिलकर बीएमसी का चुनाव लड़ा और उद्धव ठाकरे के अगुवाई वाली शिवेसना (यूबीटी) ने राज ठाकरे की मनसे के साथ मिलकर किस्मत आजमाई। मुंबई में भाजपा और शिंदे की शिवेसना को प्रचंड बहुमत मिलता दिख रहा है। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसके चलते अब पार्टी अपना मेयर बनाने की स्थिति में पहुंच गई है। भाजपा पहली बार मुंबई में अपना मेयर बनाएगी, लेकिन सवाल यही है कि बीएमसी की कमान पार्टी किसे सौंपेगी। हालांकि, भाजपा एक बात साफ कर चुकी है कि उसका मेयर मराठी समुदाय का ही होगा। बीएमसी चुनाव में भाजपा के तमाम बड़े नेता पार्षद चुने गए हैं, जिन्हें नगर सेवक भी कहा जाता है। भाजपा के दिग्गज नेता किरीट सोमैया के बेटे नील सोमैया दूसरी बार पार्षद चुने गए हैं। इसके अलावा बीएमसी चुनाव में तेजस्वी घोसालकर ने जीत हासिल कर ली है। उन्होंने दहिसर सीट से जीत हासिल की है। बीएसी चुनाव से करीब एक महीने पहले तेजस्वी ने शिवसेना (यूबीटी) गुट को छोडक़र भाजपा का दामन थाम था। बीएमसी जीत के बाद अब भाजपा के भीतर उन्हें मेयर पद के संभावित उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा भी भाजपा के कई बड़े नेता पार्षद चुने गए हैं। ऐसे में देखना है कि भाजपा किसे अपना मेयर चुनती है। विनोद उपाध्याय / 16 जनवरी, 2026