क्षेत्रीय
16-Jan-2026
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० नारायणपुर विधानसभा के तोतर और कांगा में 17 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन-लोकार्पण ० शिक्षा की राह हुई आसान - नारायणपुर में छात्राओं को साइकिल वितरण कर मंत्री केदार कश्यप ने दिया प्रेरक संदेश जगदलपुर (ईएमएस)। वनमंत्री केदार कश्यप ने अपने नारायणपुर विधानसभा के क्षेत्रीय प्रवास के दौरान कांगा एवं तोतर में विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। साथ ही छात्राओं को साइकिल वितरण कर शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। वनमंत्री केदार कश्यप ने कांगा में ग्राम पंचायत मर्दापाल में 19.85 लाख रूपये की लागत से सामुदायिक शेड एवं मंच निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। ग्राम पंचायत कांगा में सोनाबेडिन माता देवगुड़ी निर्माण हेतु 03 लाख रूपये, कोसरपदर से गोलावण्ड तक 3 किमी डामरीकरण सड़क निर्माण 03 करोड़ 18 लाख 51 हजार रूपये तथा कांगा आमापदर से कोसरपदर टेगनापखना होते हुए हीरामांदला तक 8 किमी डामरीकरण सड़क निर्माण 10 करोड़ 47 लाख 03 हजार रूपये का भूमिपूजन किया। इसी क्रम में ग्राम पंचायत चांगेर में शीतला माता मंदिर देवगुड़ी निर्माण हेतु 3 लाख रूपये तथा ग्राम पंचायत पदनार में पुलिया निर्माण कार्य 4.50 लाख रूपये की लागत से किया जाएगा। शा.उ.मा.वि. कांगा में 11 छात्राओं को साइकिल वितरण भी किया गया। तोतर क्षेत्र में वनमंत्री श्री कश्यप ने ग्राम पंचायत तोतर में देवगुड़ी निर्माण 3 लाख, सांस्कृतिक मंच निर्माण 3 लाख, पुलिया निर्माण 6 लाख तथा आमगांव से स्टॉप डेम सह पुलिया निर्माण 2 करोड़ 59 लाख 87 हजार रूपये की लागत से होने वाले कार्यों का भूमिपूजन किया। ग्राम पंचायत गोलावण्ड में देवगुड़ी निर्माण 3 लाख, सामुदायिक शेड निर्माण 15 लाख और सांस्कृतिक मंच निर्माण 3 लाख की लागत से किया जाएगा। ग्राम पंचायत मयूरडोंगर में मां हिंगलाजिन माता मंदिर देवगुड़ी निर्माण 10 लाख तथा सामुदायिक शेड निर्माण 15 लाख की लागत से होगा। इसी क्रम में ग्राम पंचायत केजंग, छोटेउसरी, रेंगागोंदी, टेमरूगांव, झारा, बोरगांव और हंगवा में पुलिया एवं सामुदायिक भवन निर्माण कार्य लाखों की लागत से किए जाएंगे। शा.उ.मा.वि. हंगवा में 15 छात्राओं को साइकिल वितरण किया गया। इस तरह 17 करोड़ से अधिक की राशि के विकास कार्यों की सौगात वनमंत्री केदार कश्यप ने क्षेत्रवासियों को दी। वनमंत्री केदार कश्यप ने जन समूह को संबोधित करते हुए कहा कि ये कार्य केवल निर्माण नहीं, बल्कि बस्तर के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। सड़क, पुलिया, देवगुड़ी, सामुदायिक भवन और सांस्कृतिक मंच जैसी आधारभूत संरचनाएँ ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार लाएँगी। किसानों को सिंचाई सुविधा, युवाओं को रोजगार और छात्राओं को शिक्षा के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि सुशासन सरकार की प्राथमिकता है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और अबूझमाड़ व बस्तर जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएँ सुनिश्चित हों वनमंत्री ने कहा है कि बस्तर में नक्सलवाद का अंत निर्णायक चरण में है और उनकी विष्णुदेव साय सरकार बस्तर के हर गांव तक विकास, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की रोशनी पहुंचाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार ने बस्तर में 1,837 माओवादियों को मुख्यधारा में शामिल किया है और उन्हें पुनर्वास की सुविधाएं प्रदान की है साथ ही स्वरोजगार के अवसर प्रशिक्षण देने का कार्य भी हो रहा है। सुधीर जैन/चंद्राकर/16 जनवरी 2026 बस्तर अब दुर्गम नहीं बल्कि सुगम और मनोरम क्षेत्र है वन मंत्री केदार कश्यप नें कहा कि बस्तर, जो कभी अपनी दुर्गम भौगोलिक स्थिति और नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, आज विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार के कार्यकाल में बस्तर क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है। विष्णुदेव साय सरकार ने केंद्र सरकार के नेतृत्व सुरक्षा और शांति की पहल की। भाजपा सरकार ने नक्सल समस्या से निपटने के लिए ठोस रणनीति अपनाई। सुरक्षा बलों की मजबूती, सड़क और संचार नेटवर्क के विस्तार से न केवल प्रशासन की पहुंच बढ़ी, बल्कि आम जनता का विश्वास भी लौटा। शांति स्थापित होने से विकास कार्यों को गति मिली। मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास योजनाएं, स्वरोजगार कार्यक्रम और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन दिया गया। बस्तर की हस्तशिल्प, लघु वनोपज और कृषि आधारित गतिविधियों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयास हुए, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिले। इसके साथ ही आदिवासी संस्कृति और पहचान के संरक्षण पर भी भाजपा सरकार ने ध्यान दिया। बस्तर की कला, परंपराओं और त्योहारों को प्रोत्साहन देकर पर्यटन को बढ़ावा मिला, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। उन्होंने कहा भाजपा सरकार के कार्यकाल में बस्तर विकास, सुरक्षा और विश्वास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। निरंतर प्रयासों और योजनाबद्ध विकास से बस्तर आज पिछड़ेपन की छवि से बाहर निकलकर प्रगति की ओर अग्रसर है। बस्तर को हम और आप मिलकर संवारेंगे। ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त पॉश एक्ट और शी-बॉक्स पोर्टल पर संभाग स्तरीय कार्यशाला संपन्न आंतरिक शिकायत समिति नहीं बनी, तो कार्यालय प्रमुख को भरना होगा 50,000 रुपये का जुर्माना जगदलपुर, 16 जनवरी 2026/ कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए बनाए गए कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम 2013 (PoSH Act) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा शिकायत निवारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार 16 जनवरी को संभाग स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन कार्यालय के कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में किया गया। कार्यशाला में अपर कलेक्टर श्री सीपी बघेल एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, स्थानीय शिकायत समिति के अध्यक्ष व सदस्य, आंतरिक शिकायत समितियों के पदाधिकारी तथा संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। राज्य स्तरीय संसाधन केन्द्र महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक श्री एस. के. चौबे ने अपने उद्बोधन में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि POSH अधिनियम के अंतर्गत सभी शासकीय एवं अशासकीय संस्थानों में प्रावधानों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। उन्होंने She-Box पोर्टल पर सभी संस्थानों की ऑनबोर्डिंग तथा आंतरिक शिकायत समिति की प्रविष्टि अनिवार्य रूप से कराने पर जोर दिया, ताकि महिलाओं की शिकायतों का त्वरित निष्पक्ष और सुरक्षित समाधान सुनिश्चित हो सके। जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री मनोज कुमार ने कहा कि सुरक्षित कार्यस्थल महिलाओं की गरिमा और अधिकारों की रक्षा का आधार है। PoSH अधिनियम न केवल शिकायत निवारण का मंच प्रदान करता है, बल्कि संस्थानों में संवेदनशीलता, जवाबदेही की संस्कृति विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सभी विभागों से अधिनियम के प्रावधानों का नियमित अनुपालन करने और कर्मचारियों को जागरूक करने का आह्वान किया। प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में मास्टर ट्रेनर श्री सर्वत नकवी ने प्रतिभागियों को अधिनियम की प्रमुख धाराओं की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि PoSH अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत किसी भी शासकीय/अशासकीय संस्था में जहाँ 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हों वहाँ आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। समिति का गठन न होने की स्थिति में कार्यालय प्रमुख पर 50,000 रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने समिति की संरचना शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, समय-सीमा, गोपनीयता तथा पीड़िता के संरक्षण से जुड़े प्रावधानों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र में राज्य स्तरीय संसाधन केन्द्र रायपुर के सहायक संचालक श्री अतुल दांडेकर ने She-Box पोर्टल के संचालन एवं तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने पोर्टल पर पंजीकरण शिकायत अपलोड करने की प्रक्रिया प्रगति ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग से जुड़े फीचर्स का लाइव डेमो देते हुए बताया कि यह प्लेटफॉर्म शिकायतों के निस्तारण को समयबद्ध, पारदर्शी और मॉनिटर करने योग्य बनाता है। कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ श्रम विभाग स्वास्थ्य विभाग, जिला पंचायत शिक्षा विभाग, नगर पालिका निगम, उच्च शिक्षा विभाग तथा जिला व्यापार एवं उ‌द्योग विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके अलावा संभाग के सभी जिलों की आंतरिक एवं स्थानीय शिकायत समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्य भी बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिससे विभिन्न संस्थानों में एकरूपता के साथ अधिनियम के पालन को गति मिलने की उम्मीद जताई गई।