ओस्लो (ईएमएस)। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में समय-समय पर प्राचीन सभ्यताओं से जुड़े ऐसे अवशेष मिलते रहे हैं, जो उस दौर की अनोखी मान्यताओं, डर और रस्मों की कहानी बयां करते हैं। हाल ही में नॉर्वे के बजुग्न इलाके में स्थित एक खेत से वाइकिंग काल की दो कब्रों की खोज ने पुरातत्वविदों को हैरानी में डाल दिया है। इन कब्रों से जुड़ा एक ऐसा अनोखा अनुष्ठान सामने आया है, जिसका उल्लेख इससे पहले कभी ऐतिहासिक अभिलेखों में नहीं मिला। इस खोज की शुरुआत तब हुई, जब रॉय सोरेंग नाम के व्यक्ति को मेटल डिटेक्टर की मदद से एक अंडाकार ब्रोच मिला। यह ब्रोच आमतौर पर 8वीं या 9वीं शताब्दी के वाइकिंग काल से जुड़ा माना जाता है। इस जानकारी के सामने आते ही नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की पुरातत्व टीम मौके पर पहुंची और खेत में खुदाई शुरू की गई। खुदाई के दौरान वैज्ञानिकों को करीब 1200 साल पुरानी एक महिला की कब्र मिली, जिसमें उस समय के कीमती गहने और ‘खजाने’ सुरक्षित अवस्था में मौजूद थे। हालांकि, इस खोज की सबसे चौंकाने वाली बात आभूषण नहीं, बल्कि वह रहस्यमयी रस्म थी, जो महिला के शव के साथ की गई थी। जांच में सामने आया कि महिला के मुंह के दोनों किनारों पर समुद्री सीपियां, जिन्हें स्कैलप शेल्स कहा जाता है, रखी गई थीं। पुरातत्वविद रेमंड सॉवेज के अनुसार, ईसाई धर्म से पहले के वाइकिंग काल की हजारों कब्रों का अध्ययन किया जा चुका है, लेकिन इस तरह की रस्म का कोई उदाहरण अब तक नहीं मिला। यही वजह है कि यह खोज वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी पहेली बन गई है। महिला को जिस तरह से पारंपरिक वाइकिंग पोशाक और कीमती गहनों के साथ दफनाया गया था, उससे संकेत मिलता है कि वह समाज में एक स्वतंत्र और संभवतः उच्च दर्जे की, शायद विवाहित महिला रही होगी। लेकिन उसके मुंह पर सीपियां रखने का कारण अब भी स्पष्ट नहीं है। क्या यह किसी विशेष धार्मिक मंत्र का हिस्सा था, या फिर आत्मा को रोकने अथवा किसी डर से जुड़ी रस्म? इन सवालों के जवाब फिलहाल शोध के दायरे में हैं। इस खेत में पिछले साल 700 ईस्वी का एक और बेहद सुरक्षित कंकाल भी मिला था, जिससे यह संदेह और गहरा गया है कि यह स्थान किसी खास धार्मिक या पारिवारिक कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा होगा। खेत के मालिक की सतर्कता के चलते इन अवशेषों को सुरक्षित तरीके से प्रयोगशाला भेज दिया गया है, ताकि खेती के दौरान इन्हें नुकसान न पहुंचे। अब वैज्ञानिक इस कंकाल पर डीएनए टेस्ट और कार्बन डेटिंग जैसे आधुनिक परीक्षण करेंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस महिला का संबंध पहले मिले कंकाल से था या नहीं। सुदामा/ईएमएस 17 जनवरी 2026