राष्ट्रीय
17-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। दिन की प्राकृतिक रोशनी टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। प्राकृतिक रोशनी में रहना न केवल मानसिक सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह मेटाबॉलिक हेल्थ को भी बेहतर बना सकता है। नई अंतरराष्ट्रीय शोध के मुताबिक, जो लोग ज्यादा समय तक नेचुरल लाइट के संपर्क में रहे, उनके ब्लड ग्लूकोज स्तर दिन के अधिक घंटों तक सामान्य दायरे में बने रहे और उसमें उतार-चढ़ाव भी कम देखा गया। यह अध्ययन स्विट्जरलैंड की जिनेवा यूनिवर्सिटी (यूएनआईजीई) और नीदरलैंड्स की मास्ट्रिच यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि प्राकृतिक रोशनी में रहने वाले प्रतिभागियों में शाम के समय मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर थोड़ा अधिक था। मेलाटोनिन को नींद का हार्मोन माना जाता है और इसका संतुलन शरीर की आंतरिक घड़ी यानी सर्कैडियन रिदम को बेहतर ढंग से संचालित करता है। इसके अलावा, इन लोगों में फैट ऑक्सीडेटिव मेटाबॉलिज्म भी बेहतर पाया गया, यानी शरीर वसा को ज्यादा प्रभावी तरीके से ऊर्जा में बदल पा रहा था। यह स्टडी टाइप 2 डायबिटीज पर प्राकृतिक रोशनी के सकारात्मक प्रभाव का पहला ठोस वैज्ञानिक प्रमाण मानी जा रही है। यूएनआईजीई में एसोसिएट प्रोफेसर चार्ना डिबनेर के अनुसार, लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि सर्कैडियन रिदम में गड़बड़ी मेटाबोलिक बीमारियों के बढ़ने में अहम भूमिका निभाती है। पश्चिमी देशों में इस तरह के मेटाबोलिक डिसऑर्डर तेजी से बढ़ रहे हैं और यह शोध उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी जोड़ता है। इस अध्ययन में 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 13 ऐसे लोगों को शामिल किया गया, जो पहले से टाइप 2 डायबिटीज से जूझ रहे थे। सभी प्रतिभागियों ने खासतौर पर डिजाइन किए गए रहने के स्थानों में 4.5 दिन बिताए। इन स्थानों में बड़ी खिड़कियों के जरिए या तो प्राकृतिक रोशनी या फिर नियंत्रित कृत्रिम रोशनी उपलब्ध कराई गई। इसके बाद कम से कम चार हफ्ते के अंतराल के बाद वही प्रतिभागी दूसरी तरह की रोशनी वाले वातावरण में दोबारा रहे। प्रोफेसर डिबनेर का कहना है कि इससे न केवल ब्लड शुगर का बेहतर नियंत्रण संभव हो सकता है, बल्कि दिमाग की सेंट्रल क्लॉक और शरीर के अन्य अंगों की आंतरिक घड़ियों के बीच तालमेल भी मजबूत होता है। यह खोज भविष्य में डायबिटीज प्रबंधन के नए और सरल तरीकों की राह खोल सकती है। शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने हर लाइट ट्रीटमेंट से पहले, उसके दौरान और बाद में प्रतिभागियों के रक्त और मांसपेशियों के सैंपल लिए। इन नमूनों के जरिए ब्लड में मौजूद लिपिड्स, मेटाबोलाइट्स और जीन ट्रांसक्रिप्ट्स का विश्लेषण किया गया। साथ ही, स्केलेटल मसल सेल्स में मॉलिक्यूलर क्लॉक के रेगुलेशन को भी परखा गया। कुल मिलाकर, स्टडी के नतीजे साफ तौर पर बताते हैं कि शरीर की आंतरिक घड़ी और मेटाबॉलिज्म प्राकृतिक रोशनी से गहराई से प्रभावित होते हैं। सुदामा/ईएमएस 17 जनवरी 2026