नई दिल्ली,(ईएमएस)। खरमास का समापन 14 जनवरी 2026 को माघ कृष्ण एकादशी के साथ हो गया है। जिससे हिंदू धर्म में शुभ कार्यों पर से प्रतिबंध हट गया है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण की शुरुआत धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए अनुकूल समय माना जाता है। इसके साथ ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों का शुभ दौर शुरू हो चुका है। इस वर्ष शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण विवाह मुहूर्त 4 फरवरी 2026 से शुरू हो रहे है। वसंत पंचमी 23 जनवरी को अबूझ मुहूर्त है, जिसमें भूमि-पूजन, भवन निर्माण, वाहन और आभूषण खरीद, छेका-सगाई जैसे कार्य शुभ माने जाते हैं। फरवरी और मार्च में कुल 28 विवाह मुहूर्त हैं, जिनमें फरवरी में 17 और मार्च में 11 मुहूर्त शामिल हैं। ये मुहूर्त गुरु, शुक्र और सूर्य की शुभ स्थिति पर आधारित हैं और विवाह संस्कार के लिए सर्वोत्तम समय माने जाते हैं। विवाह के लिए अनुकूल लग्न वृष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु और मीन माने गए हैं। वहीं अश्विनी, रेवती, रोहिणी, मृगशिरा, मूल, मघा, चित्रा, स्वाति, श्रवण, हस्त, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तरा भाद्रपद और उत्तरा आषाढ़ नक्षत्र शुभ माने गए हैं। विशेष रूप से रोहिणी, मृगशिरा और हस्त नक्षत्र में विवाह अत्यंत फलदायी होता है। खरमास समाप्ति और वसंत पंचमी के अबूझ मुहूर्त के साथ ही शादी-विवाह और धार्मिक अनुष्ठानों में तेजी आएगी। नालंदा, पटना सहित बिहार में शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी और बाजार व कारोबार भी रफ्तार पकड़ेंगे। इस शुभ समय में मांगलिक कार्यों का आयोजन सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से लाभकारी रहेगा। वहीं अश्विनी, रेवती, रोहिणी, मृगशिरा, मूल, मघा, चित्रा, स्वाति, श्रवण, हस्त, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तरा भाद्रपद और उत्तरा आषाढ़ नक्षत्रों को शुभ माना गया है। रोहिणी, मृगशिरा और हस्त नक्षत्र में विवाह होना अति उत्तम फलदायी माना जाता है। विवाह के प्रमुख शुभ दिन बनारसी पंचांग के अनुसार : फरवरी : 4, 5, 6, 7, 8, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 19, 20, 21, 24, 25, 26 और मार्च : 2, 4, 5, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13, 14 को होगी। आशीष दुबे / 17 जनवरी 2026