ज़रा हटके
18-Jan-2026
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कैरोलिंस्का (ईएमएस)। गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करने से नवजात शिशुओं में ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस (जीबीएस) संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, जो शिशु के स्वास्थ्य के लिए गंभीर साबित हो सकता है। ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस एक प्रकार का बैक्टीरिया है, जो आमतौर पर आंत या जननांगों में पाया जाता है और सामान्य परिस्थितियों में गंभीर नुकसान नहीं पहुंचाता। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक के अत्यधिक या अनियंत्रित उपयोग से यह बैक्टीरिया सक्रिय हो सकता है। इससे नवजात शिशु की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ सकती है और उसे जन्म के बाद निमोनिया, तेज बुखार या अन्य संक्रमणों का सामना करना पड़ सकता है। कुछ मामलों में यह संक्रमण शिशु के लिए जानलेवा भी हो सकता है। स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट और बेल्जियम के एंटवर्प विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा किए गए इस अध्ययन में गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक सेवन और नवजातों में जीबीएस संक्रमण के बीच संबंध का विश्लेषण किया गया। शोध के अनुसार, यदि गर्भवती महिला डिलीवरी से चार सप्ताह पहले तक एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करती है, तो नवजात में जीबीएस संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर गर्भावस्था की तीसरी तिमाही की शुरुआत को इस लिहाज से सबसे संवेदनशील अवधि माना गया है। इस शोध में बताया गया है कि गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक के संपर्क में आने से प्रसव के बाद पहले चार हफ्तों के भीतर शिशु के संक्रमित होने की आशंका अधिक रहती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह समय शिशु के विकास के लिहाज से बेहद नाजुक होता है, इसलिए इस दौरान किसी भी तरह का संक्रमण गंभीर असर डाल सकता है। अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 2006 से 2016 के बीच स्वीडन में हुए सभी एकल जन्मों के राष्ट्रीय रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। कुल 10,95,644 जीवित जन्मे शिशुओं को अध्ययन में शामिल किया गया, जिनमें से करीब 24.5 प्रतिशत शिशु जन्म से पहले एंटीबायोटिक दवाओं के संपर्क में आए थे। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह पहला ऐसा व्यापक अध्ययन है, जिसमें प्रसवपूर्व एंटीबायोटिक सेवन और नवजातों में जीबीएस संक्रमण के जोखिम के बीच सीधे संबंध की पड़ताल की गई है। सुदामा/ईएमएस 18 जनवरी 2026