नई दिल्ली (ईएमएस)। सर्दियों में शरीर के कुछ विशेष हिस्सों पर तेल लगाना न सिर्फ त्वचा को नमी और कोमलता लौटाता है, बल्कि ब्लड सर्कुलेशन को भी सुधारता है और शरीर को गर्माहट प्रदान करता है। सर्दियों के ठंडे मौसम में त्वचा रूखी, बेजान और ड्राई हो जाती है। ठंडी हवाओं के कारण शरीर की नमी कम हो जाती है, जिससे त्वचा संवेदनशील और कर्कश महसूस होने लगती है। आयुर्वेद में इस समस्या का सरल और असरदार उपाय अभ्यंग, यानी तेल से मालिश, माना गया है। आयुष मंत्रालय की सलाह है कि खास तौर पर सिर, कान और पैर पर तेल मालिश जरूर करें। ये हिस्से सर्दियों में सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं और इन पर अभ्यंग करने से विशेष लाभ मिलते हैं। अभ्यंग के लिए तिल का तेल सबसे उपयुक्त माना गया है, क्योंकि यह गर्म प्रकृति का होता है और शरीर को अंदर से गर्म करता है। इसके अलावा सरसों का तेल या नारियल तेल भी इस्तेमाल किया जा सकता है। तेल को हल्का गुनगुना करके पूरे शरीर पर अच्छी तरह लगाना चाहिए। सिर की मालिश से बाल मजबूत और घने बनते हैं, डैंड्रफ की समस्या कम होती है, सिर दर्द में राहत मिलती है और मन शांत रहता है। कानों में थोड़ा तेल डालकर हल्की मालिश करने से कान साफ रहते हैं, सुनने की क्षमता बेहतर होती है और ठंड से होने वाली समस्याओं जैसे कान दर्द या सूजन से आराम मिलता है। इससे बेहतर नींद आती है और तनाव भी कम होता है। पैरों की मालिश को अभ्यंग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पैरों में कई एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं, जिन पर तेल लगाकर अच्छी तरह रगड़ने से पूरे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है, थकान दूर होती है और नींद बेहतर आती है। साथ ही, सर्दियों में पैर फटने की समस्या भी कम होती है। अभ्यंग का नियमित अभ्यास त्वचा को मुलायम, चमकदार और पोषित बनाता है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है, जोड़ों को लचीला बनाता है और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह तरीका सरल, सुरक्षित और घर पर ही किया जा सकता है। सुबह नहाने से पहले 10-15 मिनट अभ्यंग करने के बाद गुनगुने पानी से नहाना चाहिए, ताकि तेल पूरी तरह से शरीर में समा सके और त्वचा को अधिकतम लाभ मिल सके। सुदामा/ईएमएस 18 जनवरी 2026