राष्ट्रीय
18-Jan-2026
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कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने न्यायपालिका के शीर्ष नेतृत्व से देश के संविधान, लोकतंत्र और न्यायिक शुचिता को अक्षुण्ण बनाए रखने का भावुक आग्रह किया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच के नए भवन के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत को संबोधित करते हुए देश की वर्तमान परिस्थितियों पर अपनी चिंताएं साझा कीं। उन्होंने न्यायमूर्ति सूर्यकांत से आह्वान किया कि वे देश के आम नागरिकों को विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा कथित तौर पर गलत तरीके से निशाना बनाए जाने की कार्रवाई से संरक्षण प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यायपालिका ही लोकतंत्र का अंतिम स्तंभ है, इसलिए देश के संविधान, इतिहास, भूगोल और लोकतांत्रिक मूल्यों को विनाश से बचाना अनिवार्य है। ममता बनर्जी ने प्रधान न्यायाधीश को संविधान का वास्तविक संरक्षक बताते हुए कहा कि देश की जनता न्यायपालिका के कानूनी संरक्षण में सुरक्षित महसूस करती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज में जाति या धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए और सभी को एकता के सूत्र में बंधकर देश की प्रगति के लिए सोचना और कार्य करना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने एक अन्य महत्वपूर्ण विषय मीडिया ट्रायल पर भी अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने प्रधान न्यायाधीश से आग्रह किया कि अदालती मामलों के अंतिम निपटारे से पहले ही चलने वाले मीडिया ट्रायल के बढ़ते चलन पर पूरी तरह रोक लगाई जाए, क्योंकि इससे न्याय की प्रक्रिया और व्यक्ति की छवि प्रभावित होती है। मुख्यमंत्री ने न्यायपालिका के भविष्य यानी वकीलों की नई पीढ़ी की समस्याओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कनिष्ठ वकीलों को वर्तमान में काफी संघर्ष करना पड़ रहा है और उन्हें उनके उचित लाभ व अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। इसके साथ ही, केंद्र और राज्य के बीच विधायी संबंधों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल में त्वरित अदालतों (फास्ट ट्रैक कोर्ट) के लिए धनराशि रोके जाने के बावजूद, राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से 88 ऐसी अदालतें स्थापित की हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अब तक अदालतों के बुनियादी ढांचे पर 1,200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुकी है। विशिष्ट जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में स्थापित इन विशेष अदालतों में से 52 महिलाओं के लिए समर्पित हैं, जबकि 7 पॉक्सो अदालतें, 4 श्रम अदालतें और 19 मानवाधिकार अदालतें सुचारू रूप से कार्य कर रही हैं। जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच के नए परिसर की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इसके लिए 40.08 एकड़ की बेशकीमती भूमि आवंटित की और निर्माण पर 500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और कई अन्य वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे। वीरेंद्र/ईएमएस/18जनवरी2026