इस वक्त पूरी दुनिया में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आतंक चल रहा है, कब किस पर हमला कर दे किस पर पांच सौ गुना टैरिफ लगा दे ये भगवान भी नहीं जानता, सुना है आजकल रात में सोता भी नहीं है रात भर बस इसी गुनतारे में लगा रहता है कि कल किस देश पर अपना आधिपत्य जमाना है उसका सारा स्टाफ पूरे संसार के देशों की लिस्ट लिए बैठा रहता है और वो जिस देश पर उंगली रख देता है उस पर कब्जा जमाने की कार्यवाही शुरू हो जाती है। कहते हैं बुढ़ापे में इंद्रियां शिथिल हो जाती है पर लगता है डोनाल्ड ट्रंप की तमाम इंद्रियां किसी जवान से भी ज्यादा एक्टिव हो गई है, उसका मानना है कि पूरे ब्रह्मांड में सिर्फ उसका ही राज होना चाहिए या तो सरेंडर कर दो या फिर उसके हथियारों का मुकाबला करो, अब देखो ना अभी तक ईरान को बत्ती दे रहा था अब डेनमार्क के ग्रीनलैंड को भी अमेरिका का हिस्सा बता कर वहां कब्जा करना चाहता है। रोज नई-नई बातें बताता है । संसार के तमाम छोटे-मोटे देश सुबह से रात तक यही सोचते रहते हैं कि पता नहीं उनका नंबर कब आ जाए, कब डोनाल्ड उनके देश के नाम पर उंगली रख दे । मान लिया भैया कि तुम सबसे पावरफुल हो, सबसे अमीर हो लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं कि जिस चाहे पर अड़ी पटक दो, हर देश का अपना अपना महत्व है उसे भी जीने का अधिकार है उसके नागरिकों को भी अपने देश से उतना ही प्यार है जितना तुमको अमेरिका से है, लेकिन तुम्हें तो पता नहीं कौन सा जुनून सवार हो गया है कि सब तरफ मेरा ही राज होना चाहिए जैसे पुराने जमाने में अश्वमेध यज्ञ हुआ करता था जिसमें एक राजा का घोड़ा दूसरे राजा के इलाके में जाता था और उस राज्य का राजा या तो अपने आप को सरेंडर कर देता था या फिर जिस राजा का घोड़ा होता था उससे युद्ध करता था लेकिन जो राजा अपना घोड़ा छोड़ता था वो बड़ा दमदार होता था इसलिए अधिकतर राजा उसकी अधीनता स्वीकार कर लेते थे। डोनाल्ड ट्रंप भी अश्वमेध यज्ञ टाइप का कोई काम कर रहा है लेकिन वो घोड़ा नहीं छोड़ता बल्कि मिसाइल छोड़ता है अब जो मिसाइल को देखकर डर जाए आत्मसमर्पण कर दे तो ठीक है वरना कौन सा मिसाइल कहां पहुंच जाएं क्या क्या नष्ट कर दे यह सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप ही जानता है। डोनाल्ड ट्रंप की इन हरकतों को देखकर अब अपन भी ये सोच रहे हैं कि अपना खुद का मकान बेच दें और कहीं किराएदार के रूप में शिफ्ट हो जाए क्या पता कल के दिन उसके दिमाग में ये विचार आ जाए कि इस बार भट्ट जी के मकान पर कब्जा करना है अब उससे लड़ना तो आसान है नहीं, इसलिए बेहतर है कि मकान बेच के कहीं किराए से ले ले अगर उस पर भी कब्जा करने की कोशिश करेगा तो दूसरा किराए का ढूंढ लेंगे अब बस यही विकल्प बचा है इससे बचने का । अब रिटायर हो भैया सुना है भोपाल में आईपीएस अधिकारियों की मीट हुई, हर बरस दो दिन के लिए मीट होती है जिसमें तमाम आईपीएस अधिकारी और उनकी पत्नियां शामिल होती है तरह-तरह के आयोजन होते हैं कोई गाता है, कोई नाचता है, कोई दौड़ता है, कोई भागता है कुल मिलाकर साल भर की जो टेंशन है वो इन दो दिनों में कम करने की कोशिश की जाती है अभी तक तो ये होता था कि जो आईपीएस अफसर रिटायर हो गए हैं उनको भी आईपीएस मीट में बुलाया जाता था लेकिन पता चला है कि इस बार रिटायर आईपीएस अधिकारियों को इस मीट में कोई निमंत्रण नहीं दिया गया। बेचारे रिटायर आईपीएस अधिकारी बड़े दुखी हैं कि यार क्या जलवा हुआ करता था जब नौकरी में रहते थे लेकिन रिटायर जब से हुए हैं ना तो कोई अर्दली है, ना तो कोई सरकारी गाड़ी, ना कोई पूछने वाला, और तो और आईपीएस अफसर की मीट तक में नहीं बुलाया जा रहा ,अब इनको कौन समझाए कि हुजूर सारा भपका और जलवा इंसान का नहीं कुर्सी का होता है जिस कुर्सी पर वह बैठता है ,और उस कुर्सी का कितना महत्व है उसी के हिसाब से उसे सम्मान दिया जाता है बहुत जलवा खींच लिया पिछले तीस बत्तीस सालों में, अब रिटायर हुए हो तो फिर ये मान कर चलो कि जैसे दूध में से मक्खी ने फेंक दी जाती है वैसे ही हर डिपार्टमेंट के रिटायर हो गए लोगों को डिपार्टमेंट मक्खी की तरह बाहर कर देता है इसमें रंज करने की कोई जरूरत नहीं है आईपीएस अफसर मीट का बदला लेने के लिए अपनी एक सलाह है कि आप लोग भी सब मिलजुल के एक रिटायर आईपीएस अफसरों की मीट आयोजित कर दो जिसमें आप भी वही सब कुछ करो जो वर्तमान आईपीएस अफसरों की मीट में हुआ था आप भी नाचो गाओ, दौड़ो भागो, और बताओ कि भले ही तुमने ना बुलाया हो लेकिन हमारे पास भी रिटायर लोगों की अच्छी खासी फौज है और हम भी वो सब कर सकते हैं जो तुम कुर्सी पर बैठकर कर रहे हो लेकिन हम कुर्सी से उतरकर भी कर सकते हैं पतझड़ का प्यार कहते हैं मोहब्बत का नशा जीवन में कभी नहीं उतरता । शराब का नशा तो अगर रात में पिए तो सुबह तक उतर जाता है लेकिन अगर किसी से इश्क हो गया है तो फिर उसका नशा जिंदगी भर बना ही रहता है, ऐसा ही एक मसला केरल के जयप्रकाश और रश्मि की कहानी का है। पता लगा है कि दोनों अपनी जवानी में एक दूसरे से मोहब्बत करते थे, साथ जीने मरने की कसम भी खाया करते थे एक दूसरे के सीने से लगकर धड़कनें भी गिना करते थे लेकिन अचानक पता नहीं क्या हुआ किसी कारणवश रश्मि की शादी और किसी के साथ हो गई और जयप्रकाश की किसी और के साथ। प्यार अधूरा रह गया लेकिन प्यार की कसक बनी रही, ऊपर वाले को भी लगा कि ये तो बड़ा गलत हो गया दोनों की मोहब्बत जवान थी लेकिन उनका मिलन नहीं हो पाया । बरसों बीत गए जयप्रकाश की पत्नी गुजर गई और रश्मि के पतिदेव। दोनों अपने बाल बच्चों के साथ जीवन बिता रहे थे लेकिन ऊपर वाले का भी रहम देखो अचानक दोनों का एक दिन आमना-सामना हो गया देखते ही देखते तमाम पुराने दिनों की यादों में वे दोनों खो गए और दोनों ने तय किया के भले ही जवानी में हमारा इश्क अधूरा रह गया लेकिन अब उसे अधूरे इश्क को हम पूरा करेंगे। दोनों ने अपने संतानों से बात की बेटे बेटियों ने भी हंसी-खुशी दोनों को शादी करने की परमिशन भी दे दी और बेहतरीन दोनों की शादी भी हो गई इसको कहते हैं पतझड़ का प्यार सुपर हिट ऑफ द वीक ये कौन सा कानून है कि खाना मैं ही बनाऊं?श्रीमती जी ने गुस्से से श्रीमान जी से कहा पूरी दुनिया का कानून है, कि कैदी को खाना सरकार ही देती है श्रीमान जी का उत्तर था। ईएमएस / 20 जनवरी 26