लेख
20-Jan-2026
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की छवि सारी दुनिया में एक गैंगस्टर के रूप में बन रही है। जो अपनी सत्ता और ताकत के बल पर सारी दुनिया के देशों में कब्जा करना चाहते हैं। वह दादागिरी के बल पर शांति के मसीहा बनना चाहते हैं। ट्रंप को लगता है, उनके पास ईश्वरी शक्तियां आ गई हैं। वह जो चाहे वह कर सकते हैं। वह अमेरिका के संविधान में संशोधन कर तीसरी बार राष्ट्रपति बनना चाहते हैं। राष्ट्रपति पद के दूसरे कार्यकाल में वह अपने परिवार के लोगों को सारी दुनिया के देशों में स्थापित करने की तैयारी में लगे हुए हैं। उनकी नीतियों के कारण अमेरिका और विश्व में उनका विरोध दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर जो अभियान छेड़ा है, उसे लेकर यूरोपीय और अन्य देशों पर जिस तरह का टैरिफ लगाया गया है, उसके कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी जा रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल का दूसरा वर्ष शुरू हो गया है। जब से वह दूसरी बार राष्ट्रपति बने हैं सारी दुनिया के देशों को टैरिफ के नाम पर वह धमका रहे हैं। दुनिया के 91 देशों के ऊपर अमेरिका ने टैरिफ की तलवार लटका रखी है। अमेरिका में महंगाई बढ़ती ही जा रही है। ईरान में अमेरिका को कड़ा झटका लगा है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी का जिस तरह से अपहरण कर अमेरिका की जेल में बंद करके रखा गया है, उससे ट्रंप और अमेरिका की साख सारी दुनिया में गिर गई है। ग्रीनलैंड में कब्जे और यूक्रेन को लेकर जिस तरह से डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो और यूरोपीय देशों को अपने निशाने पर लिया है, उसके बाद अमेरिका का विरोध यूरोप के देशों में बढ़ता जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ महंगाई के कारण ट्रंप अपने ही देश में अलोकप्रिय होते जा रहे हैं। हाल ही में हुए सर्वे में 58 फीसदी अमेरिकी नागरिकों ने ट्रंप की नीतियों को अमेरिका के खिलाफ बताया है। राष्ट्रपति ट्रंप के कई फेसलों पर अमेरिका की विभिन्न कोर्टों ने रोक लगा दी है। एजुकेशन, क्लीन एनर्जी और ग्रीन ट्रांजैक्शन से जुड़ी सहायता को अमेरिका ने रोक दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय विदेशी सहायता कार्यक्रम को रोक दिया है। यहां तक की वैश्विक संस्थाओं को अमेरिका द्वारा जो सहायता दी जा रही थी। उसको रोककर संस्थाओं से अलग होने की नई प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिसके कारण डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका का विरोध सारी दुनिया के देशों में बढ़ता जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ, इमीग्रेशन, रक्षा और एनर्जी के क्षेत्र में जिस तरह से यूरोपीय और नाटो देशों को नाराज किया है। इसका असर नवंबर माह में होने वाले मिड टर्म चुनाव में देखने को मिल सकता है। सर्वे के अनुसार ट्रंप संसद में अपना बहुमत खो सकते हैं। इस बात की आशंका भी जताई जा रही है। ट्रंप मिड टर्म चुनाव को टाल भी सकते हैं। जिस तरह से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप परिवारवाद को आगे बढ़ा रहे हैं। यूरोपीय और नाटो देशों के साथ जिस तरह से टकराव पैदा कर रहे हैं। उसको देखते हुए आगामी महीने डोनाल्ड ट्रंप के लिए काफी उथल-पुथल वाले साबित हो सकते हैं। अमेरिका की अभी तक जो वैश्विक छवि बनी हुई थी, उसमें तेजी के साथ दरार बढ़ती चली जा रही है। वैश्विक व्यापार संगठन की उपेक्षा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, डब्ल्यूएचओ और अन्य संस्थाओं से जिस तरह की दूरी डोनाल्ड ट्रंप बना रहे हैं। उससे स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। जिस तरह द्वितीय विश्व युद्ध के समय यूरोप से जिन कारणों से युद्ध की शुरुआत हुई थी ठीक उसी तरह की स्थिति एक बार फिर बनना शुरू हो गई है। ट्रंप की नीतियों के कारण वैश्विक आर्थिक मंदी की संभावना भी बनने लगी है। इस बात की आशंका आर्थिक विशेषज्ञ जता रहे हैं। ट्रंप की वर्तमान नीतियों से अमेरिका ठीक उसी राह पर चल पड़ा है, जैसे कभी सोवियत रूस चला था। जिसके कारण सोवियत रूस का विघटन हुआ। अमेरिका का जो वैश्विक वर्चस्व था, उसको बड़े पैमाने पर चुनौती मिल रही है। इस चुनौती का सामना किस तरह ट्रंप और अमेरिका करेगा, इसके लिए समय का इंतजार करना होगा। ईएमएस / 20 जनवरी 26