क्षेत्रीय
20-Jan-2026
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सागर (ईएमएस)। मध्यप्रदेश के सागर से एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ एक इमरजेंसी एंबुलेंस ड्राइवर को न तो नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए और न ही लंबे समय से उसका मानदेय दिया गया। न्याय की आस में पीड़ित युवक कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में पहुंचा, लेकिन वहां भी उसके साथ कथित तौर पर धमकी और दबाव बनाए जाने का आरोप लगा है। पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला सागर कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई से जुड़ा है, जहां शाहगढ़ में पदस्थ इमरजेंसी एंबुलेंस ड्राइवर वीरेंद्र अहिरवार अपनी शिकायत लेकर प्रशासन के समक्ष उपस्थित हुआ। पीड़ित का आरोप है कि उसने नियुक्ति से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी कीं, इसके बावजूद आज तक उसे न तो नियुक्ति से संबंधित पीडीएफ अथवा आदेश उपलब्ध कराया गया और न ही कई महीनों से मानदेय का भुगतान किया गया है।पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि जिस पद पर उसकी नियुक्ति की गई थी, उसी पद पर बाद में किसी अन्य व्यक्ति का चयन कर लिया गया, जिससे उसके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।वीरेंद्र अहिरवार ने जनसुनवाई में बताया कि वह बेहद गरीब परिवार से है और इसी नौकरी से उसके परिवार का भरण-पोषण होता है। वेतन न मिलने और किसी भी प्रकार के नियुक्ति दस्तावेज न होने के कारण वह मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान है। पीड़ित का यह भी कहना है कि जनसुनवाई के दौरान एक व्यक्ति ने,जो खुद को अधिकारी बता रहा था, उसे शिकायत वापस लेने के लिए डराने-धमकाने की कोशिश की। इस कथित घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें पीड़ित पर दबाव बनाए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जनसुनवाई जैसे लोकतांत्रिक मंच पर पीड़ित की आवाज दबाने की कोशिश आखिर किसके इशारे पर की जा रही है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग शाहगढ़ और सीएमएचओ अधिकारी की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं,पीड़ित परिवार ने मांग की है कि सागर कलेक्टर वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कराएं और दोषी अधिकारियों अथवा कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही वीरेंद्र अहिरवार को स्वास्थ्य विभाग शाहगढ़ में इमरजेंसी एंबुलेंस ड्राइवर के पद पर न्यायोचित रूप से नियुक्ति प्रदान की जाए और लंबित वेतन का भुगतान तत्काल किया जाए। निखिल सोधिया/ईएमएस/20/01/2026