अंतर्राष्ट्रीय
21-Jan-2026
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दावोस(ईएमएस)। स्विस एल्प्स की बर्फीली पहाड़ियों के बीच आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) में कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने एक ऐसा संबोधन दिया है। उन्होंने कहा कि अब किसी भी सूरत में अमेरिका की चौधराहट नहीं चलने देंगे। कार्नी के बयान ने वैश्विक कूटनीति के स्थापित गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। दशकों से चली आ रही अमेरिकी नेतृत्व वाली विश्व व्यवस्था पर सीधा प्रहार करते हुए कार्नी ने स्पष्ट किया कि पुराना दौर अब कभी लौटकर नहीं आएगा। उनका यह भाषण केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था की कड़वी सच्चाई का एक दस्तावेज बनकर उभरा है। कार्नी ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि विश्व वर्तमान में किसी सामान्य बदलाव के दौर से नहीं गुजर रहा, बल्कि एक भारी टूट के बीच खड़ा है। उनके अनुसार, पुरानी नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की धारणाएं अब अप्रासंगिक हो चुकी हैं। बिना किसी देश या नेता का नाम लिए, कार्नी ने उस अमेरिकी वर्चस्व पर प्रहार किया, जिसने लंबे समय तक दुनिया को यह विश्वास दिलाया था कि वैश्वीकरण का लाभ सभी को समान रूप से मिलेगा। कार्नी ने इस दावे को एक आंशिक झूठ करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि यह कहानी कभी पूरी तरह सच नहीं थी; शक्तिशाली राष्ट्र अपनी सुविधा के अनुसार नियम तोड़ते रहे और व्यापारिक नीतियां हमेशा एकतरफा लागू की गईं। यह एक तरह का उपयोगी भ्रम था जिसने कुछ समय तक वैश्विक सार्वजनिक वस्तुएं तो उपलब्ध कराईं, लेकिन अब यह व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। हाल के वर्षों में उपजे वित्तीय, स्वास्थ्य, ऊर्जा और भू-राजनीतिक संकटों का उल्लेख करते हुए कार्नी ने कहा कि आज वैश्विक परस्पर-निर्भरता सुरक्षा के बजाय एक जोखिम बन गई है। बड़ी शक्तियां अब उसी आर्थिक एकीकरण को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं, जिसे कभी समृद्धि का माध्यम माना जाता था। अब टैरिफ दबाव बनाने के औजार बन गए हैं, वित्तीय ढांचों को जबरन थोपा जा रहा है और आपूर्ति श्रृंखलाओं को ऐसी कमजोरियों में बदल दिया गया है, जिनका शोषण किया जा सके। कनाडा के संदर्भ में उन्होंने इसे एक कठोर सच्चाई बताया। कार्नी ने कहा कि अब यह धारणा टिकाऊ नहीं है कि केवल भौगोलिक स्थिति और पारंपरिक गठबंधन ही किसी देश की सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित कर देंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि जब एकीकरण ही किसी को अधीन बनाने का साधन बन जाए, तब ‘पारस्परिक लाभ’के भ्रम में जीना संभव नहीं है। उन्होंने आह्वान किया कि देशों को अब अपनी घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना होगा और किसी एक साझेदार पर निर्भरता घटाने के लिए व्यापारिक संबंधों में विविधता लानी होगी। कार्नी ने यह भी स्वीकार किया कि विश्व व्यापार संगठन और संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय संस्थान कमजोर हुए हैं, जिससे देशों को आत्मनिर्भर होकर फैसले लेने पड़ रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि जो देश खुद को भोजन, ईंधन या सुरक्षा नहीं दे सकता, उसके पास सीमित विकल्प बचते हैं। हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि यदि हर देश खुद को एक किला बना लेगा, तो दुनिया अधिक गरीब और अस्थिर हो जाएगी। अंत में उन्होंने एक गंभीर मुहावरा दोहराया— अगर आप मेज पर नहीं बैठे हैं, तो आप मेन्यू में हैं। उन्होंने पुराने दौर का शोक मनाने के बजाय एक ऐसी न्यायपूर्ण व्यवस्था बनाने की अपील की, जो किसी एक महाशक्ति की चौधराहट पर नहीं, बल्कि वास्तविक वैश्विक सहयोग पर टिकी हो। वीरेंद्र/ईएमएस/21जनवरी2026