- अभिनय कुमार जैन भोपाल (ईएमएस)। भोपाल चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज़ (बीसीसीआई) का चुनाव इस बार एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जिसने पूरे व्यापारी वर्ग को चिंता में डाल दिया है। जिस चुनाव से व्यापार, उद्योग, निवेश और उद्यमिता को दिशा मिलने की उम्मीद थी, वही अब सामाजिक समीकरणों की गिनती तक सिमटता दिखाई दे रहा है। चर्चा व्यापारिक मुद्दों की नहीं, बल्कि इस बात की ज्यादा हो रही है कि कौन उम्मीदवार किस समाज से आता है। व्यापारी हलकों में खुलकर कहा जा रहा है कि चुनाव सिंधी–पंजाबी बनाम जैन–बनिया–अग्रवाल जैसे खांचों में बंटता नजर आ रहा है। इससे न केवल चुनाव का स्तर गिरा है, बल्कि चैम्बर जैसी प्रतिष्ठित संस्था की मूल भावना पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। वरिष्ठ व्यापारियों का कहना है कि चैम्बर का उद्देश्य हमेशा व्यापारियों की साझा आवाज बनना रहा है, न कि समाजों की ताकत मापने का मंच। एक वरिष्ठ व्यापारी ने तीखे शब्दों में कहा कि “जब समाज देखा जाएगा, तब व्यापार अपने आप दम तोड़ देगा। चैम्बर अगर सामाजिक पहचान का अखाड़ा बन गया, तो छोटे और मध्यम व्यापारियों की आवाज कहीं खो जाएगी।” व्यापारिक संगठनों का आरोप है कि चुनाव को जानबूझकर सामाजिक रंग दिया जा रहा है, ताकि असल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके। टैक्स की जटिलताएं, जीएसटी से जुड़ी समस्याएं, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा, नए उद्यमियों के लिए नीति समर्थन ये सभी सवाल आज हाशिये पर चले गए हैं। उनकी जगह समाजों की संख्या, वोट बैंक और समीकरण चर्चा के केंद्र में हैं। यदि चैम्बर का नेतृत्व समाजों के गणित से तय होगा, तो फैसले भी उसी नजरिए से लिए जाएंगे। इसका सीधा नुकसान छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप्स और नए उद्यमियों को होगा, जिन्हें चैम्बर से मार्गदर्शन और समर्थन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। लंबे समय में इसका असर भोपाल के औद्योगिक विकास और निवेश माहौल पर भी पड़ेगा। व्यापारी समाज के बीच अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या भोपाल चैम्बर व्यापारियों का साझा मंच बना रहेगा या फिर अलग–अलग समाजों की पंचायत बनकर रह जाएगा। कई व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि अगर इस चुनाव में व्यापार हार गया और समाज जीत गया, तो यह हार किसी एक उम्मीदवार की नहीं, बल्कि पूरे व्यापारी वर्ग की होगी। अब निर्णायक जिम्मेदारी व्यापारी मतदाताओं पर है। उन्हें तय करना होगा कि वे भावनाओं और सामाजिक दबाव में बहकर वोट देंगे या फिर व्यापार के भविष्य को ध्यान में रखकर नेतृत्व चुनेंगे। क्योंकि यह चुनाव सिर्फ पदों का नहीं, बल्कि भोपाल के व्यापारिक भविष्य की दिशा तय करने वाला चुनाव है।