राष्ट्रीय
21-Jan-2026
...


नई दिल्ली(ईएमएस)। देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान, दिल्ली एम्स ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब एम्स में 10 लाख रुपये तक की महंगी और जटिल सर्जरी मरीजों के लिए पूरी तरह मुफ्त कर दी गई है। इस नई व्यवस्था के तहत, जिन ऑपरेशनों के लिए मरीजों को पहले निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था या भारी खर्च उठाना पड़ता था, वे अब बिना किसी शुल्क के एम्स में किए जा रहे हैं। राहत की बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में मरीज या उसके परिजनों से एक रुपया भी नहीं लिया जा रहा है। मुफ्त इलाज के साथ-साथ दिल्ली एम्स ने तकनीक के क्षेत्र में भी देश भर में अपना परचम लहरा दिया है। एम्स के सर्जिकल विभाग ने महज 13 महीनों के भीतर 1000 रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। मंगलवार को इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए सर्जिकल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील चुम्बर ने बताया कि एम्स अब रोबोटिक सर्जरी के मामले में देश के अन्य सभी अस्पतालों से आगे निकल गया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कोविड-19 के दौर में जहां पूरे देश में केवल दो या तीन रोबोटिक सिस्टम थे, वहीं आज भारत में इनकी संख्या 200 से अधिक हो गई है। सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. हेमांग भट्टाचार्य, जिन्होंने एम्स में पहली रोबोटिक सर्जरी की थी, ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि नवंबर 2024 में एम्स में पहला रोबोट आने के बाद से टीम ने कड़ी मेहनत की है। डॉक्टरों को इस तकनीक के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। उन्होंने बताया कि सबसे तेज पहली 100 रोबोटिक सर्जरी करने का गौरव भी इसी संस्थान को प्राप्त हुआ था और अब 1000 का आंकड़ा पार करना चिकित्सा जगत में एक मील का पत्थर है। विशेषज्ञों के अनुसार, रोबोटिक सर्जरी गंभीर बीमारियों के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। डॉ. सुनील चुम्बर ने बताया कि पेट, लीवर, पित्ताशय, कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट, थायरॉइड और पैंक्रियाज जैसी जटिल बीमारियों के ऑपरेशन अब रोबोटिक तकनीक से किए जा रहे हैं। इस पद्धति का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें मरीज के शरीर पर बड़ा चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है और मरीज को दर्द भी कम होता है। कम रक्तस्राव और जल्दी रिकवरी के कारण मरीजों को अस्पताल से जल्द छुट्टी मिल जाती है। हालांकि, डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि तत्काल राहत की आवश्यकता वाले इमरजेंसी मामलों में फिलहाल पारंपरिक सर्जरी ही की जाती है, क्योंकि रोबोटिक प्रक्रिया के लिए पूर्व तैयारी और समय की आवश्यकता होती है। एम्स की यह पहल देश के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है। वीरेंद्र/ईएमएस/21जनवरी2026