नई दिल्ली (ईएमएस)। अधिकारियों का कहना है कि 1.6 लाख मजदूरों से संपर्क किया गया या उनका सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया गया, लेकिन केवल 30,183 को ही भुगतान मिला, जो कुल 30.2 करोड़ रुपये के करीब है। कई लोगों के लिए तो राहत राशि बिल्कुल नहीं आई। दिल्ली में प्रदूषण के चलते ग्रैप लगने के बाद से कई मजदूरों को रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। दिल्ली सरकार ने इस तकलीफ को देखते हुए निर्माण में लगे मजदूरों के लिए 10 हजार के राहत की घोषणा की थी। अब संकट ये है कि 2.46 लाख रजिस्टर्ड मजदूरों में से केवल 12 फीसदी को ही वो 10 हजार वाली राहत राशि मिल पाई है। कई ने तो भेजे वेरिफिकेशन मैसेज का जवाब नहीं दिया और कई ने तो मैसेज ही नहीं देखा। अब तक केवल 30,183 श्रमिकों को ही भुगतान मिल पाया है। रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया। बिट्टू ने बताया जब काम रुका, तो हमारी जिंदगी भी रुक गई। वह रोजाना 800-850 रुपये कमाकर अपने परिवार का पेट पालते थे। उन्होंने कहा नवंबर से दिसंबर तक कोई काम नहीं था। हमें कर्ज लेकर गुजारा करना पड़ा। 5 जनवरी को जाकर 10,000 रुपये मिले, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। रैक पर चढ़े, किताबें लूटीं... बुक फेयर के आखिरी दिन का ये मंजर देखकर आप कहेंगे- हे भगवान! विशेष जरूरतों वाले परिवारों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर थी। प्रीति कुशवाहा के परिवार में एक दिव्यांग बेटा है, उन्होंने बताया कि देरी की वजह से वे कर्ज में डूब गए। प्रीति ने कहा हमने कर्ज लिया, मकान मालिक से कह दिया कि हम 3,000 रुपये किराया नहीं दे पाएंगे, और खाने में कटौती की, हम सिर्फ रोटी और चावल खाकर गुजारा कर रहे थे। विभाग ने हमें वेरिफिकेशन के लिए बुलाया, हमारे काम के बारे में सवाल किए और उसके बाद ही पैसे जारी किए अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/21/ जनवरी /2026