- कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप - ईओडब्लू पहुंची शिकायत भोपाल (ईएमएस)। भोपाल नगर निगम के स्लॉटरहाउस टेंडर को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने इसे सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, मिलीभगत और नैतिक पतन का गंभीर मामला बताते हुए नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि जिस स्लॉटरहाउस टेंडर को स्वयं नगर निगम ने नियमों के तहत निरस्त कर दिया था, उसी टेंडर को बाद में चुपचाप किसी अन्य पक्ष को आवंटित कर दिया गया। कांग्रेस का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के विपरीत है और इसमें नगर निगम के अधिकारियों, महापौर तथा एमआईसी सदस्यों की भूमिका संदेह के घेरे में है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अभिनव बरोलिया ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में रिश्वत, राजनीतिक संरक्षण और सत्ता के दुरुपयोग के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब टेंडर रद्द हो चुका था, तो उसे दोबारा किसके निर्देश पर जीवित किया गया। नियमों में बदलाव कर किसे लाभ पहुंचाया गया और हाल के दिनों में सामने आए गौमांस से जुड़े मामलों का इस टेंडर से क्या सीधा या अप्रत्यक्ष संबंध है। कांग्रेस का आरोप है कि गौमांस से जुड़ी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि ठेकेदारों और प्रशासन के बीच अनैतिक साठगांठ चल रही है, जो न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के लिए भी गंभीर खतरा है। इस मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्लू) में शिकायत दर्ज कराए जाने की जानकारी भी दी गई है। कांग्रेस ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए, दोषियों के नाम सार्वजनिक किए जाएं और राजनीतिक संरक्षण को तुरंत समाप्त किया जाए। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों को बचाने का प्रयास किया गया, तो पार्टी सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी। उनका कहना है कि भोपाल को “लूट की प्रयोगशाला” बनने नहीं दिया जाएगा और जनता के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।