राज्य
21-Jan-2026


विभागीय लापरवाही पर उठे सवाल भोपाल (ईएमएस)। मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में प्रशासनिक सुस्ती एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मंत्री जी द्वारा 5 जून 2025 को लोक शिक्षण संचालनालय को स्पष्ट निर्देश देते हुए पत्र जारी किया गया था, जिसमें जिले के तीन लोक सेवकों – शंकर लाल (सहायक ग्रेड-2), सी.जे. जॉनसन (सहायक ग्रेड-3) और श्रीमती अनीता बुर्रे (सहायक ग्रेड-3) – का प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण अन्य समकक्ष रिक्त पद पर करने को कहा गया था। इसके बावजूद, आज 6 महीने पूरे होने को है लेकिन अब तक न तो स्थानांतरण की प्रक्रिया पूर्ण हुई है और न ही संबंधित कर्मचारियों को नए पदस्थापन स्थल पर भेजा गया है। यह स्थिति मंत्री स्तर से दिए गए स्पष्ट निर्देशों की अनदेखी का संकेत देती है। सूत्रों के अनुसार, संबंधित टीप और शासन आदेश 6 जून 2025 को संचालनालय को प्राप्त हो गया था, जिसके आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन फाइलें अब भी कार्यालयों के बीच घूम रही हैं और कर्मचारी पूर्ववत पदों पर कार्यरत हैं। शिक्षा विभाग में बढ़ती ऐसी लापरवाहियां न केवल प्रशासनिक अक्षमता को उजागर करती हैं, बल्कि मंत्री के आदेशों की गंभीरता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती हैं। अब देखना होगा कि विभाग इस देरी का स्पष्टीकरण देता है या मंत्री स्तर से कोई कड़ा कदम उठाया जाता है। माना जा रहा है कि इन कर्मचारियों की पहुंच कुछ प्रभावशाली अधिकारियों तक है, जिसके चलते स्थानांतरण फाइलें जानबूझकर रोक दी गई हैं। इस लापरवाही से मंत्री की छवि और आदेश की गंभीरता दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह मामला न केवल प्रशासनिक ढिलाई का प्रतीक है बल्कि यह भी दिखाता है कि सिस्टम में कुछ कर्मचारी नियमों से ऊपर माने जा रहे हैं। फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया भोपाल चैप्टर को संयुक्त संचालक भोपाल संभाग लोक शिक्षण संचनालय मध्य प्रदेश पत्र कमांक 75/2024/177 दिनांक 16 जनवरी 2026 प्राप्त हआ। जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी जिला भोपाल नरेंद्र कमार अहिरवार द्वारा पत्र कमांक (DEO/ 2025/7743 दिनांक 8 अगस्त 2025 को संयुक्त संचालक भोपाल संभाग पत्र लिखकर शिकायत की गई है कि फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया भोपाल चैप्टर पदाधिकारी द्वारा ग्रेट 3 बाबू सीजी जयसन के विरुद्ध फर्जी शिकायत की गई है और इसके लिए 23 जनवरी 2026 को उपस्थित होकर अपनी समस्त जानकारी उपलब्ध करवाए। शिक्षा विभाग के अधिकारी अब भी चुप्पी साधे बैठे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि मंत्री जी इस अवहेलना पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या रसूख के आगे शासन झुकता है या सख्त कार्रवाई होती है। ईएमएस / 21 जनवरी, 2026