राज्य
21-Jan-2026
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* जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय के 21वें दीक्षांत समारोह में 578 विद्यार्थियों को डिग्रियां, 74 गोल्ड/सिल्वर मेडल व एक कैश प्राइज प्रदान जूनागढ़ (ईएमएस)| राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय के 21वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को राष्ट्र और समाज के उत्थान में योगदान देने के साथ-साथ लोगों के जीवन, स्वास्थ्य तथा प्रकृति-पर्यावरण के संरक्षण हेतु प्राकृतिक कृषि के मिशन को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी। विश्वविद्यालय के सरदार सभा गृह में आयोजित इस समारोह में कृषि क्षेत्र की विभिन्न शाखाओं के छात्र-छात्राओं को 74 गोल्ड मेडल/गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल तथा एक कैश प्राइज प्रदान किया गया। इस अवसर पर कुल 578 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। अध्यक्षीय संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि आने वाली पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य के लिए प्राकृतिक कृषि अत्यंत आवश्यक है। रासायनिक कृषि से न केवल मानव स्वास्थ्य बल्कि प्रकृति, जल और पर्यावरण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है तथा भूमि की उर्वरता में भारी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि जब धरती में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ेगा, तभी कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी। हरित क्रांति के समय भारत की मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन लगभग 2.5 प्रतिशत था, जो रासायनिक कृषि के प्रभाव से घटकर 0.5 प्रतिशत से भी नीचे चला गया है। राज्यपाल ने स्पष्ट कहा कि रासायनिक कृषि से मिट्टी का ऑर्गेनिक कार्बन घटता है और मिट्टी के पोषक तत्वों के रूप में कार्य करने वाले सूक्ष्म जीवाणु भी नष्ट हो जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र के एक रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि रासायनिक कृषि से उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत तक की कमी आई है और आगे भी यह घट सकता है। अनुशंसित मात्रा से अधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग से भूमि बंजर बन रही है तथा ऐसे कृषि उत्पादों के सेवन से कैंसर, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ी हैं। रासायनिक कृषि रोग बढ़ाती है, जबकि प्राकृतिक कृषि स्वास्थ्य प्रदान करती है। उन्होंने एक अन्य शोध का हवाला देते हुए बताया कि रासायनिक कृषि से उत्पादित गेहूं और चावल में पोषक तत्वों की कमी पाई गई है। साथ ही रासायनिक कृषि से ग्लोबल वार्मिंग की समस्या भी बढ़ती है। रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से निकलने वाली नाइट्रस ऑक्साइड गैस कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में 312 गुना अधिक खतरनाक है। डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए राज्यपाल ने समाज और राष्ट्र के हित में कार्य करने तथा जनहितकारी प्राकृतिक कृषि के मिशन को तेजी से आगे बढ़ाने और उसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने का आह्वान किया। उन्होंने गुजरात की चारों कृषि विश्वविद्यालयों, विशेष रूप से जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय को प्राकृतिक कृषि पर किए जा रहे शोध के लिए बधाई दी और कहा कि विश्वविद्यालय के शोध से यह सिद्ध हुआ है कि प्राकृतिक कृषि से उत्पादन कम नहीं होता। उन्होंने स्वदेशी बीजों के उन्नयन, प्राकृतिक कृषि में नए शोध और इस अभियान को और गति देने का भी अनुरोध किया। राज्य में लगभग 8 लाख किसान प्राकृतिक कृषि अपना चुके हैं, यह गुजरात सरकार के प्रयासों का परिणाम है। इस अवसर पर हरियाणा के करनाल स्थित महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. एस. के. मल्होत्रा ने दीक्षांत प्रवचन देते हुए कहा कि यह समारोह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि शैक्षणिक प्रतिबद्धता, शोध और सेवा की दो दशकों की यात्रा का उत्सव है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में कृषि की केंद्रीय भूमिका पर बल दिया तथा फल-सब्जी उत्पादन में नवीन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग की आवश्यकता बताई। गुजरात की सुजलाम-सुफलाम योजना और ड्रिप इरीगेशन को देश के लिए मॉडल बताया। समारोह में राज्यपाल के करकमलों से विश्वविद्यालय की आधुनिक, आकर्षक और मोबाइल-फ्रेंडली नई वेबसाइट का लोकार्पण किया गया। विद्यार्थियों को एसएसआईपी ग्रांट के स्वीकृति पत्र वितरित किए गए तथा विश्वविद्यालय का वार्षिक रिपोर्ट भी जारी किया गया। कुलपति डॉ. वी. पी. चोवटिया ने स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी दी, जबकि कार्यक्रम के अंत में रजिस्ट्रार वाई. एच. घेलाणी ने आभार व्यक्त किया। दीक्षांत समारोह के पश्चात राज्यपाल ने प्राकृतिक कृषि से उत्पादित सब्जियों और अनाज के प्रदर्शन स्टॉल्स का भी अवलोकन किया। सतीश/21 जनवरी