हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि डीएमके की सरकार और उदयनिधि स्टालिन हिंदू विरोधी हैं और उनकी पूरी विरासत हिंदू विरोधी है। उदयनिधि स्टालिन उस विरासत से आते हैं, जहां ‘हिंदू को दो गाली तो मिलेगी बैंक की ताली।’ आलम यह है कि जिसने हेट स्पीच दी, उसे छोड़ दिया गया और जिसने यह बताया कि यह हेट स्पीच है, उनके ऊपर पूरी सरकारी मशीनरी टूट पड़ी। ‘है जुबां पर संविधान, पर फैलाते हैं नफरत ये भाईजान और करते हैं हिंदू का अपमान, यही बन चुकी है डीएमके की पहचान।’ हिंदू विरोधी, भगवान मुरुगन विरोधी और संविधान विरोधी डीएमके ने हिंदुओं को दीपम जलाने का उनका संवैधानिक अधिकार देने वाले जज के खिलाफ भी महाभियोग का फतवा जारी किया था। डीएमके की पहली ‘बीएफएफ’ कांग्रेस पार्टी कहती है कि प्रभु श्रीराम का अस्तित्व नहीं है। समाजवादी पार्टी कहती है कि मठाधीश माफिया हैं। डीएमके की संगति और यह पूरा गठबंधन ही हिंदू विरोधी है। इस्लामोफोबिया के नाम पर तुरंत खड़ा हो जाने वाला इकोसिस्टम तब क्यों साइलेंट मोड और फ्लाइट मोड पर चला जाता है जब देश के 80 प्रतिशत हिंदुओं के नरसंहार की बात की जाती है? मद्रास हाईकोर्ट ने जिस डीएमके सरकार को लताड़ लगाई है, उसके बाद उदयनिधि स्टालिन के अपने पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं बचता। उदयनिधि स्टालिन को तुरंत हटाया जाना चाहिए और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए। नई दिल्ली(ईएमएस)। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित किया। शहजाद पूनावाला ने मद्रास हाईकोर्ट द्वारा डीएमके सरकार की राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित कार्रवाई के तहत अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज किए जाने का स्वागत किया। पूनावाला ने कहा कि तमिलनाडु में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार से ग्रस्त है। इन गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए हिंदू समुदाय के खिलाफ इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं, जो एक खास वोट बैंक को खुश करने की कोशिश है और पूरी तरह संविधान विरोधी है। इसके बावजूद पूरा इंडी गठबंधन चुप्पी साधे हुए मूकदर्शक बना हुआ है। शहजाद पूनावाला ने कहा कि कल जो मद्रास हाईकोर्ट का आदेश आया, उसके विषय में यही कहा जा सकता है कि ‘सत्यमेव जयते’। प्रतिशोध की राजनीति के तहत भाजपा आईटी सेल के प्रमुख और बंगाल के सह प्रभारी अमित मालवीय को सच बोलने के कारण प्रताड़ित करने के उद्देश्य से लिए उनके विरुद्ध डीएमके ने यह मामला फाइल किया था। मद्रास हाईकोर्ट ने इस प्रतिशोध की भावना से की गई इस एफआईआर को खारिज कर दिया। वर्ष 2023 में तमिलनाडु के उप-मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु में आयोजित एक सम्मेलन में भाग लिया था, जहां उन्होंने केवल सनातन का विरोध ही नहीं किया, बल्कि सनातन को पूरी तरह से समाप्त करने और खत्म करने का आह्वान भी किया था। इसी सम्मेलन में उदयनिधि स्टालिन ने हिंदू धर्म और सनातन की तुलना डेंगू और मलेरिया से की थी, यह एक तरह से हिंदुओं के खिलाफ नरसंहार का आह्वान था। जब इस विषय को अमित मालवीय ने उठाया और उदयनिधि स्टालिन की इन टिप्पणियों के संबंध में एक ट्वीट किया, तो उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पूरी डीएमके सरकारी मशीनरी, पुलिस और अन्य एजेंसिययां अमित मालवीय के पीछे लग गईं। उदयनिधि स्टालिन के इस जहरीले बयान पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि कार्रवाई उन लोगों पर की गई जिन्होंने हिंदू होने के नाते और सनातनी होने के नाते इस विषय को उठाया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि कल मद्रास हाईकोर्ट का जो निर्णय आया है, वह अत्यंत महत्वपूर्ण है। मद्रास हाईकोर्ट ने कल उस एफआईआर को खारिज कर दिया है और इसे खारिज करते समय यह कहा है कि डीएमके की सरकार और उदयनिधि स्टालिन हिंदू विरोधी हैं तथा उनकी पूरी विरासत हिंदू विरोधी है। उनके बयान हेट स्पीच की श्रेणी में आते हैं और अमित मालवीय के खिलाफ की गई कार्रवाई कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। हाईकोर्ट ने न केवल एफआईआर को खारिज किया है, बल्कि इस निष्कर्ष पर भी पहुंचा है कि यह बयान डीएमके के हिंदू विरोधी और संविधान विरोधी डीएनए की विरासत से आ रहा है। मद्रास हाईकोर्ट, मदुरै बेंच के पैरा 22 में लिखा है कि यह दिखाने के लिए पर्याप्त रिकॉर्ड मौजूद हैं कि डीएमके द्वारा हिंदू धर्म पर हमले की घटनाएं पहले भी हुई हैं, जिसमें चोटी काटना, जनेऊ काटना और सुअर को जनेऊ पहनाना शामिल हैं। इन घटनाओं को लेकर कई शिकायतें की गई हैं, लेकिन किसी पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पैरा 22 में यह भी लिखा गया है कि एक पार्टी के रूप में डीएमके हिंदू धर्म पर हमला करती है। श्री पूनावाला ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट के पैरा 23 में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि समग्र विचार करने पर मंत्री का भाषण पूरी तरह से 80 प्रतिशत हिंदुओं के खिलाफ है और यह हेट स्पीच की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन हिंदू विरोधी विरासत से आते हैं और आईपीसी की धारा 153, 153A, 505 और 504 अमित मालवीय पर नहीं, बल्कि मंत्री के भाषण पर लगनी चाहिए। पैरा 23 में कोर्ट यह कहता है कि उदयनिधि स्टालिन द्वारा दी गई स्पीच 80 प्रतिशत हिंदुओं के समूल नाश और नरसंहार की बात करने वाली है तथा यह हेट स्पीच के अंतर्गत आती है। उदयनिधि स्टालिन उस विरासत से आते हैं, जहां ‘हिंदू को दो गाली तो मिलेगी बैंक की ताली।’ पैरा 24 में कोर्ट ने दुख के साथ कहा है कि हेट स्पीच देने वाला व्यक्ति मुक्त है, जबकि हेट स्पीच पर प्रतिक्रिया देने वाले अमित मालवीय कानून का सामना कर रहे हैं। इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि जिन्होंने हेट स्पीच दी, उन्हें छोड़ दिया गया और जिन्होंने यह बताया कि वह हेट स्पीच है, उनके ऊपर पूरी सरकारी मशीनरी टूट पड़ी। मद्रास हाईकोर्ट ने अपने आदेश के पैरा 26 में साफ तौर पर कहा है कि इस मामले में तमिलनाडु पुलिस की ओर से दाखिल किया गया हलफनामा राजनीति से प्रेरित है। अदालत ने यह भी कहा कि यह हलफनामा जांच अधिकारी द्वारा दायर किया गया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अधिकारियों का काम निष्पक्ष और गैर-राजनीतिक होना चाहिए, लेकिन यहां वे एक राजनीतिक दल का पक्ष लेते हुए नजर आ रहे हैं, जो निंदनीय है। पैरा 26 में यह भी कहा गया है कि जिस प्रकार से तमिलनाडु पुलिस ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते हुए हेट स्पीच देने वाले को छोड़ दिया और उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जिसने यह बताया कि यह हेट स्पीच है। यह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। पैरा 27, जो कि अंतिम पैराग्राफ है, उसमें कोर्ट ने साफ और स्पष्ट राय दी है। कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता अमित मालवीय के खिलाफ इस मामले को आगे बढ़ाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इसलिए कोर्ट ने एफआईआर को रद्द करने का निर्णय लिया और एफआईआर को खारिज कर दिया। कोर्ट के अनुसार यदि यह मामला जारी रहता, तो राज्य एजेंसियों के माध्यम से अमित मालवीय को प्रताड़ित किया जाता, जो संविधान और कानून दोनों के विरुद्ध होगा, इसी कारण इस मामले को खारिज किया गया है। शहजाद पूनावाला ने कहा कि डीएमके न केवल हिंदू विरोधी है, बल्कि संविधान विरोधी भी है। ‘है जुबां पर संविधान, पर फैलाते हैं नफरत ये भाईजान और करते हैं हिंदू का अपमान, यही बन चुकी है डीएमके की पहचान।” यह कोई इकलौता बयान नहीं है, सुबह से यह देखा जा रहा है कि डीएमके के नेता कह रहे हैं कि यह गलत व्याख्या है, हम गलत व्याख्या कर रहे हैं, मीडिया गलत व्याख्या कर रहा है और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट भी गलत व्याख्या कर रहा है। डीएमके नेताओं को यह समझना चाहिए कि 4 मार्च 2024 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने उसी टिप्पणी के लिए उदयनिधि स्टालिन को फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि ‘आपने अनुच्छेद 19(1-ए) के तहत अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है। आप कोई आम आदमी नहीं हैं, आप एक मंत्री हैं। आपको अपने भाषण के परिणामों का पता होना चाहिए।’ सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी भाषण को हेट स्पीच माना था। सुप्रीम कोर्ट को व्याख्या नहीं आ रही, हाईकोर्ट को व्याख्या नहीं आ रही, हिंदुओं को व्याख्या नहीं आ रही, केवल डीएमके को ही व्याख्या आ रही है। यह डीएमके का चरित्र और डीएनए बन चुका है। कुछ ही दिन पहले इसी मंच से तमिलनाडु के प्रभारी पीयूष गोयल ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय उठाया था, जो कोर्ट के आदेश के आधार पर था। उस समय भी मद्रास हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यह निर्णय दिया था कि दीपम मामले में एकल न्यायाधीश का फैसला सही है कि हिंदुओं को कार्तिकेय दीपम जलाने का अधिकार है। उस समय भी डीएमके ने उस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए संबंधित जज के खिलाफ महाभियोग का फतवा जारी किया था। उस समय भी डीएमके ने अपने हिंदू विरोधी, भगवान मुरुगन विरोधी और संविधान विरोधी स्वभाव के चलते उस एकल जज के खिलाफ महाभियोग का फतवा जारी किया था, जिसने हिंदुओं को दीपम जलाने का उनका संवैधानिक अधिकार दिया था। श्री पूनावाला ने कहा कि ‘यह कोई संयोग नहीं है। यह तमिलनाडु में डीएमके का हिंदुओं को गाली देने का, डराने का सोचा-समझा वोट बैंक का उद्योग है’। उस समय भी हाईकोर्ट का अवलोकन और निष्कर्ष यही था कि डीएमके सरकार हिंदू समुदाय को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रयोग से रोकने के लिए काल्पनिक सार्वजनिक अशांति के मुद्दे खड़े कर रही है और उस पर कोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार भी लगाई थी। यदि डीएमके का पूरा चरित्र देखा जाए, तो उसके एक नेता ए राजा के बयान रिकॉर्ड पर मौजूद हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘हिंदू धर्म भारत और दुनिया के लिए खतरा है।’ डीएमके के भीतर कुछ लोग यह अंतर करने की कोशिश कर रहे हैं कि यह बयान सनातन के बारे में था, हिंदुओं के बारे में नहीं था लेकिन ए राजा का एक और बयान था कि ‘हम प्रभु श्री राम के शत्रु हैं।’ डीएमके के नेता अपने कार्यकर्ताओं से कहते हैं कि ‘हिंदू प्रतीकों को मत पहनो।’ इस तरह के बयान किसी अन्य धर्म के बारे में डीएमके द्वारा कभी नहीं दिए जाते। यह भी देखा जाना चाहिए कि डीएमके किस गठबंधन का हिस्सा है। वहां तो मानो प्रतियोगिता चल रही है कि कौन हिंदुओं को ज्यादा डरा सकता है, कौन हिंदुओं को ज्यादा गाली दे सकता है और कौन हिंदुओं का ज्यादा अपमान कर सकता है। शहजाद पूनावाला ने कहा कि डीएमके की सबसे करीबी सहयोगी ‘बीएफएफ’ कांग्रेस पार्टी है और कांग्रेस पार्टी कहती है कि प्रभु श्रीराम का अस्तित्व नहीं है। कांग्रेस पार्टी हिंदू आतंकवाद और भगवा आतंक जैसी बातें करती है और प्रियांक खरगे द्वारा यह कहा गया कि सनातन एक बीमारी है। यही कांग्रेस राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को नाच-गाना कहती है और राम मंदिर के निर्माण को लटकाने, अटकाने और भटकाने का काम करती रही है। डीएमके की दूसरी बीएफएफ समाजवादी पार्टी है, जो मठाधीशों को माफिया कहती है, रामचरितमानस को जलाने की बात करती है, राम मंदिर को बेकार बताती है और हिंदुओं पर गोलियां चलाने के लिए गौरव महसूस करती है। डीएमके की तीसरी बीएफएफ तृणमूल कांग्रेस है, जिसके नेता कहते हैं कि प्रभु श्रीराम मुस्लिम थे, जय श्रीराम बोलने पर जेल भेजने की धमकी दी जाती है और हाल ही में ‘जागो मां’ गीत गाने वाले एक गायक के साथ टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट की गई। डीएमके की संगति को देखकर यह साफ है कि यह पूरा गठबंधन हिंदू विरोधी है। यह पूरा इंडी गठबंधन दो बातों के लिए जाना जाता है, जो है हिंदू विरोध और संविधान विरोध। इसके बावजूद ये लोग स्वयं को संविधान का रक्षक और संविधान बचाने वाला बताकर घूमते रहते हैं। शहजाद पूनावाला ने कहा कि इस पूरे इकोसिस्टम से तीन सवाल हैं। पहला सवाल, अमित मालवीय के मामले में फ्री स्पीच और संविधान बचाने की बातें कहां चली गईं? केवल परेशान करने के उद्देश्य से एक फर्जी मामला दर्ज किया गया और राज्य की एजेंसियों का इस्तेमाल केवल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए किया गया और इसके बावजूद यह कह रहे हैं कि हम संविधान बचा रहे है। दूसरा सवाल यह है कि जो कांग्रेस पार्टी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद को हिंदू धर्म की सबसे बड़ी समर्थक बताती है, जनेऊधारी हिंदू होने का दावा करती है और कोट पर जनेऊ पहनकर स्वयं को हिंदू दिखाती है, वह चुप क्यों है? जब डीएमके सरकार उस व्यक्ति को संरक्षण दे रही है, जिसने खुले तौर पर हिंदुओं को खत्म करने जैसी बात कही, तब कांग्रेस की यह खामोशी क्या दर्शाती है? राहुल गांधी, जो अक्सर हेट स्पीच के समर्थन में खड़े नजर आते हैं, अब तक उदयनिधि स्टालिन को बर्खास्त करने की मांग क्यों नहीं कर रहे हैं? उन्होंने यह मांग क्यों नहीं उठाई कि तमिलनाडु में उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए? राहुल गांधी के पास कोई जवाब है? क्या कांग्रेस पार्टी के पास कोई जवाब है? और क्या इस पूरे इकोसिस्टम के पास कोई जवाब है? जो पूरा समूह इस्लामोफोबिया के नाम पर तुरंत खड़ा हो जाता है और यह कहता है कि मुस्लिमों के साथ क्या किया जा रहा है, उसकी चिंताओं को जायज बताया जाता है, लेकिन क्या हिंदूफोबिक बयान देना, हिंदू आस्था पर चोट करना और 80 प्रतिशत हिंदुओं के नरसंहार, समाप्ति और मिटा दिए जाने की बात करना कोई चिंता का विषय नहीं है? इस मुद्दे पर पूरा इकोसिस्टम खामोश है, पूरा इकोसिस्टम साइलेंट मोड और एयरप्लेन मोड पर चला गया है, मानो उन्हें कोई सिग्नल ही नहीं मिल रहा हो। श्री पूनावाला ने कहा कि कुल मिलाकर जिस प्रकार से मद्रास हाईकोर्ट ने डीएमके सरकार को लताड़ लगाई है, उसके बाद उदयनिधि स्टालिन के अपने पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं बचता। उदयनिधि स्टालिन को तुरंत हटाया जाना चाहिए और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए, क्योंकि उनके बयान को इस देश की 80 प्रतिशत आबादी, अर्थात् हिंदू समुदाय के खिलाफ हेट स्पीच कहा गया है। ऐसे बयान इसलिए भी दिए जा रहे हैं क्योंकि डीएमके भारत के इतिहास की सबसे भ्रष्ट सरकार चला रही है। यदि पूरे इतिहास को देखा जाए, तो तमिलनाडु की डीएमके सरकार से अधिक भ्रष्ट कोई सरकार नहीं रही है। डीएमके सरकार में 880 करोड़ रुपये का “कैश फॉर जॉब्स” घोटाला हुआ, 1000 करोड़ रुपये का “कॉन्ट्रैक्ट के लिए रिश्वत” घोटाला सामने आया और उसी मंत्री से जुड़ा एक नया घोटाला भी उजागर हुआ है, जिसमें ईडी द्वारा पुलिस को डोजियर सौंपा गया है। यह “ट्रांसफर के लिए रिश्वत” घोटाला 365 करोड़ रुपये का है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ट्रांसफर और पोस्टिंग तक में भ्रष्टाचार किया गया है। तमिलनाडु में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है, सिस्टम पूरी तरह भ्रष्टाचार से ग्रस्त है और इन्हीं मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए हिंदू समुदाय के खिलाफ इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं। यह सब एक विशेष वोट बैंक को खुश करने के उद्देश्य से किया जा रहा है और यह तरीका सबसे अधिक संविधान विरोधी है। इसके बावजूद पूरा इंडी गठबंधन चुप है और मूकदर्शक बना हुआ है। ईएमएस / 21 जनवरी, 2026