राष्ट्रीय
22-Jan-2026
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प्रयागराज (ईएमएस)। उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। 48 घंटे के अंदर प्रयागराज प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेज दिया है। इस नोटिस में मौनी अमावस्या के दिन बैरियर तोड़ने और फिर जबरन भीड़ में पालकी घुसाने को लेकर सवाल किया गया हैं। नोटिस में पूछा गया है कि क्यों न आपको हमेशा के लिए माघ मेला से बैन किया जाए। अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगी राज ने कहा, योगी सरकार अब बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है। पंडाल के पीछे गुपचुप तरीके से नोटिस चस्पा किया। बुधवार देर रात प्रशासन का एक कर्मचारी शिविर में आया। कर्मचारी ने कहा कि आपने इस नोटिस का जवाब नहीं दिया। तब जाकर हमें इसकी जानकारी हुई। उन्होंने कहा, हम लोगों ने नोटिस देखा, तब उस नोटिस पर 18 जनवरी की डेट पड़ी थी। फिलहाल, नोटिस का जवाब तैयार है। जल्द प्रशासन को दिया जाएगा दूसरे नोटिस में अविमुक्तेश्वरानंद से 2 सवाल किए गए है। पहला मौनी अमावस्या के दिन अपने इमरजेंसी के लिए रिजर्व पांटून पुल पर लगा बैरियर तोड़ा। बिना अनुमति के बग्घी के साथ संगम जाने की कोशिश की। इससे भगदड़ का खतरा पैदा हो गया। आपके कारण सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हुआ। दूसरा सवाल पूछा गया कि अपने खुद को शंकराचार्य बताकर मेला में बोर्ड लगाए हैं। जबकि आधिकारिक रूप से आपके शंकराचार्य होने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है। अगर 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तब संस्था को दी गई जमीन और सुविधाएं रद्द की जा सकती हैं। इसके पहले, सोमवार रात 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार मेला प्रशासन का नोटिस लेकर शंकराचार्य के शिविर पहुंचे थे। हालांकि, शिष्यों ने रात को नोटिस लेने से मना किया था। इसके बाद मंगलवार सुबह 8 बजे कानूनगो दुबारे पहुंचे और शिविर के गेट पर पहला नोटिस चस्पा किया था। इसमें सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला देकर पूछा गया था कि उन्होंने खुद को शंकराचार्य कैसे घोषित कर लिया। 12 घंटे बाद, यानी मंगलवार रात 10 बजे अविमुक्तेश्वरानंद ने 8 पन्नों का जवाब मेला प्रशासन को भिजवाया। अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन को चेतावनी दी थी कि अगर नोटिस वापस नहीं लिया गया, तब मानहानि का केस करुंगा। बात दें कि 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कह दिया। विरोध करने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। इससे नाराज अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे। वहीं माघ मेला में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ कथित मारपीट का मामला राज्य मानवाधिकार आयोग पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने मामले की आयोग से शिकायत की है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही, जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है, उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी की गई है। आशीष दुबे / 22 जनवरी 2026