- एमपी वक्फ बोर्ड के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर ईओडब्ल्यू में की थी झूठी शिकायतें - ब्लैकमेलिंग के भी लगे है गंभीर आरोप भोपाल(ईएमएस)। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के नाम पर कूट रचित दस्तावेज तैयार कर लोकायुक्त संगठन में शिकायतें दर्ज कराने और इसके जरिए कई लोगो को ब्लैकमेल करने के गंभीर आरोप में भोपाल जिला वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अलीम कुरैशी को शाहजहांनाबाद पुलिस ने लंबे समय बाद गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर आगे की पूछताछ के लिये रिमांड पर लिया है। - यह था मामला थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 21 मार्च 2025 की जांच के दौरान वक्फ बोर्ड की मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉक्टर फरजाना गजाल के कथन दर्ज किए गए। उन्होंने अपने आवेदन की पुष्टि करते हुए बताया कि लोकायुक्त में प्रस्तुत किए गए नियुक्ति आदेश वक्फ बोर्ड द्वारा जारी नहीं किए गए थे। जांच में पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी मोहम्मद अहमद खान के बयान भी दर्ज किए गए। उन्होंने साफ किया कि लोकायुक्त में लगाए गए आदेश पत्र उनके द्वारा जारी मूल आदेश से पूरी तरह भिन्न हैं। केवल आदेश क्रमांक और दिनांक समान हैं, जबकि भाषा, शब्द और प्रारूप अलग हैं। साथ ही दस्तावेज पर किए गए हस्ताक्षर भी उनके वास्तविक हस्ताक्षर से मेल नहीं खाते, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि हस्ताक्षर की नकल करने का प्रयास किया गया। - जॉच में वक्फ बोर्ड और ईओडब्ल्यू की शिकायत प्रतियों में मिली गड़बड़ी अलीम द्वारा शिकायत में दिये गए नियुक्ति पत्र निकले फर्जी, इन्हें बोर्ड ने कभी जारी ही नहीं किया पुलिस जांच के दौरान मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड से मूल आदेश की सत्यापित प्रति प्राप्त की गई, वहीं लोकायुक्त संगठन में की गई शिकायतों की प्रतियां भी जुटाई गईं। जांच में सामने आया कि आरोपी अलीम कुरैशी ने कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर बार-बार शिकायतें कर सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया। तथ्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराएं 318(4), 338, 336(3) और 340(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। पुलिस के मुताबिक, अलीम कुरैशी ने 17 अगस्त 2023 को लोकायुक्त संगठन में वक्फ बोर्ड में नियुक्तियों को लेकर शिकायत की थी। जांच के बाद लोकायुक्त ने 22 सितंबर 2023 को शिकायत को निराधार मानते हुए नस्ती कर दिया था। इसके बावजूद 13 जनवरी 2025 को आरोपी ने उसी विषय में दोबारा शिकायत दर्ज कराई। दूसरी जांच में यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि शिकायत के साथ लगाए गए नियुक्ति पत्र फर्जी थे और वक्फ बोर्ड ने कभी जारी ही नहीं किए। - बार-बार की गई शिकायतो से शासन का नुकसान पहुंचा जांच एजेंसियों का कहना है कि बार-बार की गई इन शिकायतों से न केवल शासन को नुकसान पहुंचा, बल्कि वक्फ बोर्ड की साख भी प्रभावित हुई और आमजन में भ्रम की स्थिति बनी। पुलिस को आशंका है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर दबाव बनाने और अवैधानिक लाभ लेने की मंशा से यह पूरा खेल रचा गया। गौरतलब है, कि अलीम कुरैशी पहले मध्यप्रदेश पुलिस में पदस्थ था, लेकिन कार्यकाल के दौरान दर्ज मामलों और अनियमितताओं के चलते उसे सेवा से बर्खास्त किया गया था। इसके बाद वह राजनीति में सक्रिय हुआ और भोपाल जिला वक्फ कमेटी का अध्यक्ष बना। अब वक्फ संपत्तियों और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े इस मामले में उसकी भूमिका जांच के घेरे में है। जुनेद / 22 जनवरी