अंतर्राष्ट्रीय
27-Jan-2026
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सेंट जॉर्ज (ईएमएस)। प्रेग्नेंसी के दौरान पैरासिटामोल लेने से अजन्मे बच्चे में ऑटिज्म, अटेंशन-डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर या बौद्धिक विकलांगता का कोई खतरा नहीं बढ़ता। वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है एक ताजा शोध के बाद। यह शोध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को भी खारिज करता है, जिसमें उन्होंने गर्भवती महिलाओं से इस दवा से बचने की अपील की थी। पैरासिटामोल, जिसे एसिटामिनोफेन भी कहा जाता है और जो टायलेनॉल की मुख्य सामग्री है, गर्भावस्था के दौरान दर्द और बुखार के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली दवा है। दुनियाभर में इसे पहली पसंद के तौर पर इसलिए दिया जाता है, क्योंकि इसकी सेफ्टी प्रोफाइल अन्य दर्द निवारक दवाओं, जैसे नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स और ओपिओइड्स की तुलना में बेहतर मानी जाती है। यही वजह है कि यह दवा डब्ल्यूएचओ की आवश्यक दवाओं की सूची में भी शामिल है। यह नई स्टडी 43 अलग-अलग अध्ययनों पर आधारित एक सिस्टमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस है। रिसर्च में गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामोल के उपयोग और बच्चों में न्यूरोडेवलपमेंटल समस्याओं के बीच किसी भी प्रत्यक्ष संबंध का कोई ठोस सबूत नहीं मिला। सेंट जॉर्ज यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स, यूके के ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर अस्मा खलील ने कहा कि इस समीक्षा और विश्लेषण में यह स्पष्ट हुआ है कि मां द्वारा प्रेग्नेंसी के दौरान पैरासिटामोल लेने से बच्चों में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, एडीएचडी या बौद्धिक विकलांगता का जोखिम नहीं बढ़ता। उन्होंने बताया कि जब लंबे समय तक फॉलो-अप वाले अध्ययन, भाई-बहनों के तुलनात्मक अध्ययन और कम पूर्वाग्रह वाले डेटा को शामिल किया गया, तब भी नतीजे समान रहे। यूके, इटली और स्वीडन के शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले की कुछ ऑब्जर्वेशनल स्टडीज में जो संबंध बताए गए थे, वे सीधे तौर पर पैरासिटामोल के प्रभाव के कारण नहीं थे। बल्कि इसके पीछे मां की पहले से मौजूद बीमारी, बुखार, आनुवंशिक संवेदनशीलता या पर्यावरणीय कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि पैरासिटामोल से पूरी तरह बचना भी खतरनाक हो सकता है, क्योंकि बिना इलाज के दर्द और बुखार गर्भपात, समय से पहले प्रसव और जन्मजात दोषों का जोखिम बढ़ा सकते हैं। सुदामा/ईएमएस 27 जनवरी 2026