वाशिंगटन,(ईएमएस)। मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध की आहट तेज हो गई है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी नौसेना का विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन तीन अन्य घातक युद्धपोतों के साथ पश्चिम एशिया के रणनीतिक जलक्षेत्र में तैनात हो चुका है। इस भारी सैन्य जमावड़े ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। अपुष्ट खबरों के अनुसार, सुरक्षा कारणों से ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को एक सुरक्षित बंकर में स्थानांतरित कर दिया गया है और प्रशासन की कमान फिलहाल उनके बेटे के हाथों में होने की चर्चा है। हालांकि अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने इस तैनाती को केवल क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने का एक कदम बताया है, लेकिन कूटनीतिक गलियारों में इसे ईरान पर एक निर्णायक प्रहार की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। सैन्य सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों का दावा है कि अमेरिका ने ईरान के उन वरिष्ठ अधिकारियों और ठिकानों को चिन्हित किया है, जो दमनकारी नीतियों और क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। खुफिया इनपुट के अनुसार, वर्तमान में ईरान की आंतरिक स्थिति 1979 की क्रांति के बाद के सबसे कमजोर दौर से गुजर रही है। देश न केवल गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, बल्कि शासन की जनता पर पकड़ भी पहले के मुकाबले काफी ढीली हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुफिया एजेंसियों ने सूचित किया है कि यह ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमताओं को कमजोर करने का सबसे उपयुक्त समय हो सकता है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि स्थिति और बिगड़ी, तो सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटा जाएगा। इस संभावित संघर्ष के बीच भू-राजनीतिक समीकरण भी तेजी से बदल रहे हैं। ईरान के पड़ोसी और क्षेत्रीय शक्ति संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता का सम्मान करता है और किसी भी युद्ध का हिस्सा नहीं बनेगा। यूएई के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह अपनी जमीन, हवाई क्षेत्र या समुद्री सीमा का उपयोग ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य हमले के लिए नहीं होने देगा। यह घोषणा अमेरिका के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका मानी जा रही है, क्योंकि खाड़ी देशों के सहयोग के बिना बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यूएई ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी शत्रुतापूर्ण गतिविधि के लिए न तो आधार प्रदान करेगा और न ही कोई लॉजिस्टिक सहायता देगा। दूसरी ओर, ईरान ने इन धमकियों का जवाब बेहद तल्ख लहजे में दिया है। तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि उनकी सेना हाई अलर्ट पर है और किसी भी छोटे या सीमित हमले को पूर्ण युद्ध की घोषणा माना जाएगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके परमाणु ठिकानों या सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया, तो इसका जवाब इतना कठोर होगा कि पूरा क्षेत्र इसकी चपेट में आ जाएगा। गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी इसी तरह के तनाव के दौरान अमेरिका ने अपने बी-2 बॉम्बर्स के जरिए कुछ खास ठिकानों को निशाना बनाया था। वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक बेड़े, जिसे आर्माडा कहा जा रहा है, की मौजूदगी ने यह संकेत दे दिए हैं कि आने वाले कुछ दिन वैश्विक शांति और तेल आपूर्ति की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील होने वाले हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/27जनवरी2026 -----------------------------------