राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन सारंगपुर (ईएमएस)। केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए यूजीसी अधिनियम संशोधन 2026 के विरोध में करणी सेना परिवार एवं स्वर्ण समाज के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को खेडापति हनुमान मंदिर से रैली निकालकर तहसील स्तरीय विरोध प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम का ज्ञापन एसडीएम रोहित बम्होरे को सौपा गया । इस आंदोलन में राजपूत क्षत्रिय महासभा ,परशुराम सेना, करणी सेना,ब्राह्मण , कायस्थ महाजन, बनिया सहित स्वर्ण समाज के विभिन्न संगठनों की सहभागिता रही। इस मौके पर ज्ञापन का वाचन एडवोकेट कुशल शर्मा द्वारा करते हुए कहा कि यह ज्ञापन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यू.जी.सी. द्वारा हाल ही में जारी की गई नई गाइड लाईनो के संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है जिसमे देश भर के विश्वविधालयो शिक्षको, एवं अभिभावको में गहरी असुरक्षा, भय एंव असंतोष का वातावरण उत्पन्न हो गया है। यह विषय केवल प्रशासनिक निर्णय तक सीमित न होकर संवैधानिक अधिकारो प्राकृतिक न्याय अकादमिक स्वतंत्रता तथा राष्ट्र के बौद्धिक भविष्य से प्रत्यक्ष रूप से जुडा हुआ है मुख्य आपित्तयों एवं चिन्ताएँ सामने आ रही है। उक्त गाइड लाइनो में ऐसे प्रावधान परिलक्षित होते है जिनसे शिकायतो को ही प्राथमिक सत्य मानकर कार्यवाही की संभावना बनाई गई है जबकि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतो पर आधारित है। जहाँ सुनवाई प्रमाण और निष्पक्षता अनिवार्य है। तथा किसी छात्र या शिक्षक की मंशा सोच अथवा दृष्टिकोण को बिना ठोस शाक्ष्य के निर्धारित करना न केवल विधि के विरूद्ध है बल्कि इसरो चयनित उत्पीडन व्यवहारिक दमन का मार्ग प्रशस्त होता है। इससे शिक्षा संस्थान ज्ञान के केन्द्र न रहकर संदेह और भय का केद्र बनते जा रहे है। तथा गाइड लाइनो में असत्य या दुर्भावनापूर्ण शिकायत करने वालो पर स्पष्ट दण्डात्मक प्रावधानों का अभाव है जिससे व्यक्तिगत रंजिश एवं वैचारिक विरोध के दुरुपयोग की पूरी संभावना बनती है। ज्ञापन मे यह भी कहा गया है कि जब भारतीय न्याय संहिता एवं विश्वविद्यालय के आंतरिक अनुशासन नियग पहले से अस्तित्व में है तब समान प्राकृतिक की अतिरिक्त कठोर गाइड लाइनों का लागू होगा शिक्षा सुधान नही बल्कि प्रशारानिक अतिरेका प्रतीत होता है। तथा इन गाइड लाइनो से विश्वविद्यालय ज्ञान, शौथ और विमर्श के केन्द्र न रहकर संदेह निगरानी और आत्म सेंसरशिय बनते जा रहे है राष्ट्रहित में नही है। अतः ज्ञापन के माध्यम से मांग की जाती है कि यू.जी.सी. की उक्त नई गाइड लाइनो पर प्रभाव से तत्काल रोक लगाई जाए तथा इन गाइड लाइनों को स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति, संसदीय समिति के समक्ष पुनरीक्षण हेतु भेजा जाए एंव शिकायत निवारण प्रक्रिया को प्रमाण सुनवाई निष्पक्षत्ता, जवाबदेही से मुक्त किया जाए व झूठी एवं दुर्भावनापूर्ण शिकायतो पर स्पष्ट और प्रभावी दण्डात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए जाए तथा देश के विश्वविद्यालयो की अकादमिक स्वतंत्रता गरिमा और अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा की जाए । यदि समय रहते इस विषय पर हस्तक्षेप नहीं किया गया तो यह व्यवस्था शिक्षा सुधार के बजाए शिक्षा व्यवरथा में अभिश्राप है और वैचारिक दमन का कारण बनेगी जिसका दीर्घकालीन दुष्प्रभाव राष्ट्रपर पडेगा । इस मौके पर स्वर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यूजीसी अधिनियम संशोधन 2026 स्वर्ण समाज के विरुद्ध एकतरफा एवं भेदभावपूर्ण कानून है। उन्होंने इसे ‘काला कानून’ बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद से लगातार ऐसे कानून बनाए जा रहे हैं, जिनका सीधा प्रभाव स्वर्ण समाज पर पड़ रहा है।ज्ञापन मे कहा कि यदि सरकार समय रहते इस कानून को वापस नहीं लेती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा। - जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने का आरोप वक्ताओं ने आरोप लगाया कि यूजीसी अधिनियम संशोधन 2026 जैसे कानून समाज में जातिगत विभाजन को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब प्रत्येक समाज का व्यक्ति किसी न किसी क्षेत्र में उच्च पदों पर है, तो फिर जाति के आधार पर नए-नए कानून लाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। इस संबंध मे स्वर्ण समाज एवं करणी सेना के पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि अब समाज चुप नहीं बैठेगा। जब तक यह कानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।इस दौरान बडी सख्या मे लोग मौजूद थे।