27-Jan-2026
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जबलपुर (ईएमएस)। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की एकलपीठ ने दमोह एसपी को निर्देश दिए हैं कि प्रेमविवाह करने वाले नवयुगल को तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। दमोह जिले के हटा निवासी स्वयं अग्रवाल एवं आर्या मिश्रा की ओर से अधिवक्ता विशाल डेनियल ने न्यायालय में पक्ष रखा। याचिका में बताया गया कि दोनों ने आपसी सहमति से हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया है, जिसका युवती के परिजन विरोध कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। इतना ही नहीं, युवक की हटा स्थित किराना दुकान को आग लगाने की भी धमकी दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने 7 जनवरी को इस संबंध में पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर हाई कोर्ट का रुख किया गया। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने एसपी को नवयुगल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रमोशन में आरक्षण नीति पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब जबलपुर। प्रमोशन में आरक्षण को लेकर राज्य सरकार की नई नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा एवं न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने सरकार से सवाल किया कि नई नीति में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन कहां किया गया है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि आरबी राय प्रकरण में बताई गई कमियों को दूर करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए और पुरानी नीति में किन सुधारों के बाद नई नीति लाई गई। राज्य सरकार को इन सवालों के जवाब के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी। सुनवाई के दौरान अजाक्स और सपाक्स संगठनों की ओर से दलीलें दी गईं। अजाक्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. के.एस. चौहान एवं रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रमोशन में आरक्षण नीति-2025 के नियम 11 (1,2,3) सहित कई प्रावधान असंवैधानिक हैं। उन्होंने तर्क दिया कि नियमों में मेरिट के आधार पर पदोन्नत कर्मचारियों को भी आरक्षित वर्ग में गिनने का प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के विपरीत है। सपाक्स की ओर से अधिवक्ता अमोल श्रीवास्तव ने भी पक्ष रखा। हाई कोर्ट ने नियमों में गंभीर त्रुटियों की ओर संकेत करते हुए सरकार से जवाब तलब किया। व्यापमं मामले की आरोपित डॉक्टर को सशर्त राहत, देश छोड़ने पर रोक जबलपुर। हाई कोर्ट की युगलपीठ ने व्यापमं घोटाले की आरोपित डॉक्टर आकांक्षा तोमर को सशर्त राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता निर्धारित समय-सीमा में रूरल सर्विस बांड की राशि जमा कर देती हैं, तो केवल जांच लंबित होने के आधार पर उन्हें एनओसी से वंचित नहीं किया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने जांच एजेंसियों की आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता के देश छोड़ने पर सशर्त प्रतिबंध लगाया है। ग्वालियर निवासी आकांक्षा तोमर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर रूरल सर्विस बांड से छूट अथवा राशि जमा कर एनओसी जारी करने की मांग की थी। राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित ने दलील दी कि व्यापमं मामले की जांच अभी लंबित है और याचिकाकर्ता निगरानी से बाहर जा सकती हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि केवल आशंका के आधार पर किसी के संवैधानिक अधिकारों को सीमित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता 30 दिनों के भीतर ग्रामीण सेवा बांड की राशि जमा करें, आधार, पैन और पासपोर्ट की प्रतियां प्रस्तुत करें, दो जमानतदारों के साथ लिखित अंडरटेकिंग दें तथा करीबी रिश्तेदारों से इंडेम्निटी बांड प्रस्तुत करें। सीबीआई कोर्ट की अनुमति के बिना देश छोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सभी शर्तें पूरी होने पर राज्य शासन को एनओसी जारी करनी होगी।