भोपाल (ईएमएस)। भोपाल चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के आगामी तीन वर्षों के लिए होने वाले चुनाव अब निर्णायक मोड़ में प्रवेश कर चुके हैं। नामांकन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद अब मतपत्र क्रमांक व परीचित नामों की पर्चियों का दौर पूरे ज़ोर पर है। व्यापारी अपने-अपने प्रत्याशियों की पर्चियां तैयार कर व्यक्तिगत रूप से एक-दूसरे से संपर्क कर समर्थन का निवेदन कर रहे हैं। चुनावी माहौल में इस बार एक नया रुझान साफ़ तौर पर देखने को मिल रहा है। पैनल आधारित प्रचार के साथ-साथ व्यक्तिगत प्रचार भी तेजी से उभर कर सामने आया है। कई प्रत्याशी सीधे मतदाताओं तक पहुँच बना रहे हैं, जिससे चुनावी सरगर्मी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। इधर, विभिन्न पैनलों द्वारा बाज़ारों में सामूहिक जनसंपर्क अब अंतिम चरण में पहुँच चुका है। अंतिम दौर के संपर्क अभियानों में व्यापारियों की भागीदारी बढ़ी है और समर्थन जुटाने की कवायद तेज़ हो गई है। हालांकि, इस चुनाव में एक चिंताजनक पहलू भी उभर कर सामने आ रहा है। जातिगत आधार पर प्रचार भी काफी जोर पकड़ता नज़र आ रहा है। अलग-अलग वर्गों में अपनी-अपनी जाति के प्रत्याशियों को विजयी बनाने की अपीलें की जा रही हैं। जानकारों और वरिष्ठ व्यापारियों का मानना है कि यह प्रवृत्ति न तो व्यापारी हित में है, न चैंबर के दीर्घकालिक हित में और न ही सामाजिक सौहार्द के लिए उचित मानी जा सकती है। चैंबर जैसे व्यावसायिक संगठन में योग्यता, दृष्टि और व्यापारिक समझ को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, न कि जातिगत समीकरणों को। वहीं दूसरी ओर, चुनाव अधिकारी भी अपनी तैयारियों के अंतिम चरण में हैं। मतदान प्रक्रिया को सुव्यवस्थित, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कुल मिलाकर, पर्चियों के इस दौर ने चुनावी तापमान को और बढ़ा दिया है। अब सभी की निगाहें मतदान के दिन पर टिकी हैं, जहाँ यह तय होगा कि भोपाल चैंबर की आगामी दिशा किस ओर जाएगी। अभिनय कुमार जैन