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29-Jan-2026
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- शासन ने मांगी पूरी रिपोर्ट - फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आरोपों की जांच तेज लखनऊ/अयोध्या (ईएमएस)। अयोध्या में तैनात जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह द्वारा सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देने की घोषणा के बावजूद, अब तक उनका त्यागपत्र न तो उत्तर प्रदेश शासन को प्राप्त हुआ है और न ही राज्य कर आयुक्त कार्यालय में इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि हो सकी है। इस स्थिति ने प्रशासनिक हलकों में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है और पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, विभागीय अधिकारी स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि जब तक लिखित रूप में विधिवत इस्तीफा प्राप्त नहीं होता, तब तक किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या अनुशासनात्मक कार्रवाई पर निर्णय नहीं लिया जा सकता। ऐसे में सार्वजनिक मंच से किए गए इस्तीफे के ऐलान को केवल एक बयान माना जा रहा है, न कि औपचारिक त्यागपत्र। गौरतलब है कि प्रशांत कुमार सिंह ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में भावनात्मक बयान देते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। इस ऐलान ने न सिर्फ प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी थी। हालांकि, उसी दिन देर रात उनके सगे भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने उन पर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के सहारे सरकारी नौकरी पाने का गंभीर आरोप लगा दिया, जिससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने राज्य कर आयुक्त से प्रशांत कुमार सिंह से संबंधित पूरी रिपोर्ट तलब कर ली है। शासन ने निर्देश दिए हैं कि रिपोर्ट में उनके खिलाफ लंबित जांच, जारी नोटिस, अब तक की गई कार्रवाई और संभावित विभागीय कदमों का पूरा विवरण शामिल किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि इस्तीफे की घोषणा किन परिस्थितियों में की गई और क्या इसका संबंध चल रही जांच से है। डॉ. विश्वजीत सिंह का दावा है कि प्रशांत कुमार सिंह ने कथित रूप से फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हासिल की। उन्होंने इस संबंध में 20 अगस्त 2021 को औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद मेडिकल बोर्ड द्वारा दो बार जांच के लिए बुलाए जाने के बावजूद प्रशांत के पेश न होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शासन स्तर पर अब संबंधित चिकित्सा अधिकारियों से अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है। प्रशांत कुमार सिंह की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी इस मामले को और संवेदनशील बना रही है। वे पहले अमर सिंह की पार्टी ‘लोकमंच’ से जुड़े रहे हैं और बाद में पीसीएस परीक्षा के जरिए सेवा में आए। हाल के दिनों में उनके राजनीतिक दावों और पोस्टरों ने भी विवाद को हवा दी है।