रियाद,(ईएमएस)। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बदलते समीकरणों के बीच पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चिंताजनक खबर सामने आई है। जिन खाड़ी देशों को इस्लामाबाद अपना सबसे भरोसेमंद सहयोगी मानता था, वे अब आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भारत के साथ मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात के बाद अब सऊदी अरब ने भी भारत के साथ सुरक्षा संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है, जिससे पाकिस्तान की कूटनीतिक मुश्किलें बढ़ गई हैं। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में 28 जनवरी 2026 को भारत-सऊदी अरब सिक्योरिटी वर्किंग ग्रुप की तीसरी उच्च-स्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण वार्ता के दौरान दोनों देशों ने उन आतंकी संगठनों पर विस्तार से चर्चा की, जो वैश्विक शांति के साथ-साथ उनके अपने क्षेत्रों के लिए भी गंभीर खतरा बने हुए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि सऊदी अरब ने वर्ष 2025 में पहलगाम और लाल किले के पास हुए आतंकी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। चूंकि पहलगाम हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित गुटों का हाथ होने के साक्ष्य मिले थे, इसलिए सऊदी का यह रुख सीधे तौर पर इस्लामाबाद के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। बैठक में दोनों देशों ने आतंकवाद की फंडिंग रोकने, कट्टरपंथ से निपटने और इंटरनेट के गलत इस्तेमाल के खिलाफ साझा रणनीति बनाने पर सहमति जताई है। यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से इस्लामिक भाईचारे की दुहाई देकर इन देशों का समर्थन हासिल करता रहा है। हालांकि, अब आर्थिक और सुरक्षा हितों ने इन समीकरणों को बदल दिया है। सऊदी अरब और यूएई जैसे देश अब भारत को एक विशाल निवेश बाजार और एक जिम्मेदार सुरक्षा भागीदार के रूप में देख रहे हैं। भारत की कूटनीतिक सफलता इस बात से भी समझी जा सकती है कि हाल ही में उसने यूएई के साथ एक ‘स्ट्रेटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप’ पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि सऊदी अरब और यूएई के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं, लेकिन भारत ने दोनों देशों के साथ स्वतंत्र और बेहद मजबूत संबंध विकसित किए हैं। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्पष्ट किया है कि खाड़ी देशों के साथ भारत की बढ़ती रक्षा निकटता किसी युद्ध की तैयारी नहीं, बल्कि एक गहरी मित्रता का स्वाभाविक विस्तार है। पाकिस्तान के लिए यह स्थिति किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीय वहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, वहीं भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव इन देशों को नई दिल्ली के और करीब ला रहा है। आतंकवाद पर सऊदी का यह कड़ा रुख स्पष्ट करता है कि अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के पुराने एजेंडे के लिए कोई जगह नहीं बची है। वीरेंद्र/ईएमएस/29जनवरी2026