लेख
31-Jan-2026
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आमजन ही नही कई बड़े नेता भी है जो विमान या हेलीकॉप्टर हादसों में हमेशा-हमेशा के लिए न सिर्फ राजनीति बल्कि इस दुनिया से ही विदा हो गए है।कांग्रेस नेता संजय गांधी से लेकर माधवराव सिंधिया, वाईएस राजशेखर रेड्डी, जीएमसी बालयोगी और अरुणाचल के पूर्व मुख्यमंत्री दोरजी खांडू व हाल ही में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पंवार इन सभी की मौतों ने देश को झकझोर दिया है।सन 1950 से सन 2026 में ऐसे कम से कम 9 हाई-प्रोफाइल राजनीतिक चेहरे हवाई हादसों में मारे गए है। अब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पंवार का विमान हादसे में जाना सभी को अखर गया है।बारामती के पास एक निजी विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, यह वही प्राइवेट विमान था, जिसमें उपमुख्यमंत्री अजित पवार सवार थे। इस विमान में कुल 5 लोग सवार थे। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने हादसे में सभी 5 लोगों की मौत की पुष्टि की है।हवाई यात्रा में अचानक हुई मौतों की एक लंबी और दर्दनाक सूची बन गई है, खासकर उन नेताओं की जिन्होंने अपने करियर के सबसे मजबूत दौर में जनता की सियासत को दिशा देनी शुरू की थी। लेकिन उनका जीवन प्लेन या हेलीकॉप्टर के सफर में आसमान में ही खत्म हो गया। इनमें 23 जून 1980 को कांग्रेस के उभरते चेहरे संजय गांधी, जिन्हें इंदिरा गांधी के बाद कांग्रेस का सबसे ताकतवर चेहरा माना जा रहा था, एक विमान हादसे के दौरान दिल्ली के सफदरजंग एयरपोर्ट के पास मारे गए। उनकी मौत ने न सिर्फ कांग्रेस बल्कि देश की राजनीति की दिशा बदल दी थी। 30 सितंबर 2001 को माधवराव सिंधिया का बीकॉफ्ट विमान पटना के पास क्रैश हुआ और उनकी मौत हो गई। सिंधिया उस दौर में राष्ट्रीय राजनीति में तेजी से उभर रहे थे और मंत्रालयों में उनकी पकड़ गहरी होती जा रही थी। उनकी अचानक मौत ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया था।वही 3 मार्च 2002 में लोकसभा के अध्यक्ष जीएमसी बालयोगी व तेलुगू देशम पार्टी के नेता का हेलीकॉप्टर तालाब में गिर गया और बालयोगी की वहीं मौत हो गई। इसी तरह 8 मार्च 2005 को हरियाणा के मंत्री ओ।पी। जिंदल का किंग कोबरा हेलीकॉप्टर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में क्रैश हुआ और जिंदल की मौत हो गई। ओपी जिंदल इंडस्ट्रियल सेक्टर के बड़े नाम और राजनीति में तेजी से बढ़ते चेहरे थे, इस हादसे ने हरियाणा की राजनीति को हिलाकर रख दिया था। वही 2 सितंबर 2009 को आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी का हेलीकॉप्टर नल्लमाला जंगल में खराब मौसम के चलते क्रैश हो गया था, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। वे उस समय दक्षिण भारत के बड़े जननेता माने जाते थे। इसी प्रकार अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू का पवन हंस हेलीकॉप्टर चीन बॉर्डर के पास 30 अप्रैल 2011को क्रैश हो गया और वे मौत की नींद सो गए। भारत के पहले ऑर्मी चीफ स्टार जनरल बिपिन रावत 8 दिसंबर 2021 को हेलीकॉप्टर से जा रहे थे,उनका हेलीकॉप्टर तमिलनाडु के कुन्नूर में क्रैश हो गया,उस समय विपिन रावत के साथ उनकी पत्नी और 11 अन्य सैनिक भी मारे गए थे। यह हादसा राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के लिए सबसे बड़ा झटका था। वही गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी जून 2025 में अहमदाबाद के पास एक एयर इंडिया विमान हादसे का शिकार हुए।रूपाणी भाजपा के महत्वपूर्ण चेहरा थे और संगठनात्मक राजनीति में उनकी पकड़ मजबूत थी।एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का विमान जब बारामती में लैंडिंग करने जा रहा था,उसी समय हादसे का शिकार हुआ। प्लेन हादसे लैंडिंग और टेकऑफ के समय ज्यादा होते हैं। इसे फ्लाइट का सबसे अहम समय माना जाता है। अहमदाबाद में भी प्लेन क्रैश टेकऑफ के समय हुआ था। आखिर ज्यादातर प्लेन हादसे लैंडिंग और टेकऑफ के समय ही क्यो होते हैं।इस समय कई तकनीकी और मानव कारक एक्सीडेंट के लिए जिम्मेदार है। इस समय को इसलिए भी अहम माना जाता है, क्योंकि इस दौरान पायलट के पास स्थिति से निपटने के लिए बहुत कम समय होता है।इस समय प्लेन कम ऊंचाई पर होता है और किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए बहुत कम समय होता है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, सन2005 से सन 2023 तक हुए सभी प्लेन हादसों में से आधे से ज्यादा यानि 53 प्रतिशत लैंडिंग के समय हुए,जबकि टेकऑफ के दौरान होने वाले हादसे दूसरे नंबर पर हैं। सन 2015 से सन 2024 तक जो कॉमर्शियल जेट हादसे हुए, उनमें टेकऑफ फेज में 20प्रतिशत हादसे हुए है।वहीं इस दौरान लैंडिंग फेज में 47प्रतिशत हादसे हुए है। जब प्लेन कई हजार फीट पर उड़ता है तो उस समय पायलट के पास काफी समय होता है,उस समय अगर दोनों इंजन बंद भी हो जाएं, तो भी प्लेन अचानक आसमान से नीचे नहीं गिरेगा, यह एक ग्लाइडर बन जाता है और पायलट कुछ ना कुछ सुरक्षा व्यवस्था कर लेते हैं, लेकिन, लैंडिंग या टेकऑफ के समय की स्थिति नाजुक होती है।इसमें भी लैंडिंग को सबसे जटिल प्रोसेस माना जाता है। कई पायलट कहते हैं कि टेकऑफ फिर भी आसान है, लेकिन लैंडिंग चुनौतीपूर्ण होती है। इस वक्त प्लेन को सही रफ्तार, सही एंगल और रनवे की सही पोजीशन पर उतारना पड़ता है। बारिश, कोहरा, तेज हवा और रात का समय पायलट के लिए चुनौती बढ़ाते हैं। छोटे से फॉल्ट से विमान रनवे से बाहर निकल सकता है। कई बार ऑटो-पायलट मोड या अन्य नेविगेशन सिस्टम में छोटी गलती भी विमान को असंतुलित कर देता है। इस वक्त पायलट को स्पीड के बारे में लगातार निर्णय लेने पड़ते हैं। माना जाता है कि ज्यादातर प्लेन हादसे, खासकर लैंडिंग फेज के दौरान, पायलट की गलती के चलते होते हैं। वहीं, जब प्लेन कम ऊंचाई पर होते हैं तो इनके पक्षियों से टकराने और खराब मौसम का सामना करने की आशंका भी ज्यादा होती है।लैंडिंग गियर विमान के नीचे लगे पहिए और सपोर्ट सिस्टम होते हैं, जिनका काम टेकऑफ के समय विमान का वजन संभालना होता है। इसके अलावा लैंडिंग के समय तेज झटके को रोकना, रनवे पर ब्रेक लगाना और दिशा कंट्रोल करना भी इसका काम होता है। अक्सर इसमें होने वाली गड़बड़ी से लैंडिंग और टेकऑफ के वक्त हादसे हो जाते हैं। जब विमान 250–300 किमी/घंटा की रफ्तार से रनवे को छूता है, तो लैंडिंग गियर शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करता है। कई बार हाइड्रोलिक सिस्टम जाम हो जाने से, गियर ना खुल पाने से, लॉकिंग सिस्टम फेल हो जाने से कई बार लैंडिंग गियर ठीक से काम नहीं कर पाता और ये हादसे की वजह बन जाता है। (लेखक वरिष्ठ साहित्यकार व ज्वलंत मुद्दों के जानकार है) ईएमएस / 31 जनवरी 26