- बाजार विश्लेषकों ने मौजूदा गिरावट की तुलना 1980 के ‘सिल्वर थर्सडे’ से की नई दिल्ली (ईएमएस)। कमोडिटी बाजार में शुक्रवार को अचानक हलचल देखने को मिली। पिछले कुछ हफ्तों से तेजी पकड़ चुकी चांदी ने निवेशकों को चौंका दिया और रिकॉर्ड उच्च स्तर से बड़ी गिरावट दर्ज की। एक दिन में चांदी में 1,07,971 तक की गिरावट आई। सोने के भाव में भी दबाव बना रहा, जिससे कीमती धातुओं में निवेशकों की चिंता बढ़ गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अचानक गिरावट के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला, मुनाफावसूली क्योंकि पिछले हफ्तों में चांदी में लगातार तेजी देखने को मिली थी। दूसरा, अमेरिकी डॉलर की मजबूती जो सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव डालती है। डॉलर मजबूत होने के बाद निवेशक अन्य विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे धातुओं की मांग और कीमत में गिरावट आती है। बाजार विश्लेषकों ने मौजूदा गिरावट की तुलना 1980 के ‘सिल्वर थर्सडे’ से की है। उस समय हर्बर्ट और बंकर हंट नामक अमेरिकी अरबपतियों ने चांदी को बड़े पैमाने पर खरीदा था, जिससे कीमतें असामान्य रूप से बढ़ीं। नियामक हस्तक्षेप और मार्जिन नियमों में कड़ाई के कारण 27 मार्च 1980 को चांदी की कीमत एक ही दिन में 50 फीसदी गिरकर 11 डॉलर से नीचे चली गई। यह घटना चांदी के ‘हाई-बीटा’ स्वभाव को दर्शाती है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा फेड के नए चेयरमैन की घोषणा के बाद डॉलर मजबूत हुआ, जिससे कीमती धातुओं में दबाव बना। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। निवेशकों को संयम और सतर्कता से निवेश करने की आवश्यकता है, ताकि अचानक उतार-चढ़ाव से नुकसान कम किया जा सके। सतीश मोरे/31जनवरी ---