खेल
31-Jan-2026
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- टीम इंडिया ‘वेट एंड वॉच’ मोड में नई दिल्ली (ईएमएस)। विशाखापट्टनम में मिली हार के बाद एक बार फिर भारतीय क्रिकेट फैंस की नजर उस ऑलराउंडर पर टिक गई है, जो पिछले कुछ महीनों से टीम इंडिया के लिए संकटमोचक साबित होता रहा है। वॉशिंगटन सुंदर की फिटनेस इस वक्त न सिर्फ फैंस बल्कि टीम मैनेजमेंट के लिए भी सबसे बड़ी चिंता बन चुकी है। 7 फरवरी से शुरू हो रहे टी20 वर्ल्ड कप 2026 से ठीक पहले उनकी चोट ने भारतीय टीम की तैयारियों और रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीसीसीआई से जुड़े एक सूत्र ने साफ किया है कि वॉशिंगटन सुंदर की चोट को जल्दबाजी में ठीक कराने की कोई कोशिश नहीं की जा रही है। बोर्ड चाहता है कि उनकी रिकवरी पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से हो। जब तक सुंदर पूरी तरह फिट नहीं हो जाते, तब तक उन्हें रिटर्न-टू-प्ले प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि टीम मैनेजमेंट जरूरत पड़ने पर आखिरी वक्त तक इंतजार करने को भी तैयार है। अगर सुंदर वर्ल्ड कप के बाद होने वाले मुकाबलों तक फिट हो सकते हैं, तो टीम उनके लिए धैर्य दिखा सकती है। वॉशिंगटन सुंदर का अहम फिटनेस टेस्ट 4 फरवरी को बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में होना है। यह टेस्ट टूर्नामेंट शुरू होने से महज तीन दिन पहले रखा गया है, जिससे साफ है कि चयनकर्ता उन्हें मौका देने के लिए अंतिम समय तक इंतजार करना चाहते हैं। सुंदर 11 जनवरी को न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे मैच के दौरान साइड स्ट्रेन का शिकार हो गए थे और तभी से वह मैदान से बाहर हैं। आईसीसी के नियमों के मुताबिक, सभी टीमों को 30 जनवरी तक अपने स्क्वाड में बदलाव करने की अनुमति है। इसके बाद किसी भी खिलाड़ी को बदलने के लिए आईसीसी की इवेंट टेक्निकल कमेटी से विशेष मंजूरी लेनी होगी, जो आमतौर पर गंभीर चोट की स्थिति में ही मिलती है। ऐसे में 30 जनवरी की तारीख भारतीय चयनकर्ताओं के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। अगर इस डेडलाइन तक सुंदर की रिकवरी को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आती, तो रवि बिश्नोई या रियान पराग जैसे स्टैंडबाय खिलाड़ियों को आधिकारिक टीम में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है। टीम इंडिया के लिए वॉशिंगटन सुंदर की अहमियत काफी ज्यादा है। वह पावरप्ले में किफायती स्पिन गेंदबाजी करने के साथ-साथ निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी भी कर सकते हैं। उनकी मौजूदगी से टीम को अतिरिक्त स्पिन विकल्प और बल्लेबाजी में गहराई मिलती है, जो भारतीय और श्रीलंकाई पिचों पर बेहद प्रभावी साबित हो सकती है। नई गेंद से विकेट निकालने और रन गति पर लगाम लगाने की उनकी क्षमता उन्हें बाकी स्पिनरों से अलग बनाती है। फिलहाल टीम मैनेजमेंट ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति पर चल रहा है। सुंदर ने नेट्स पर बल्लेबाजी शुरू कर दी है, लेकिन पसलियों के आसपास अब भी दर्द की शिकायत सामने आ रही है। 4 फरवरी का फिटनेस टेस्ट उनके वर्ल्ड कप भविष्य का फैसला करेगा। अब टीम इंडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह पूरी तरह फिट न होने की स्थिति में जोखिम उठाए या समय रहते किसी रिप्लेसमेंट का ऐलान करे।