-ये कदम अमेरिकी डॉलर की वैश्विक बादशाहत को बचाने की रणनीति का हिस्सा वॉशिंगटन,(ईएमएस)। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उठाने के बाद अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल से होने वाली कमाई उड़ा ली और उसे एक अन्य देश में छिपा दिया है। अभी मादुरो की किडनैपिंग को एक महीना भी नहीं बीता है और इतने वक्त में ही अमेरिका ने इस देश से सैकड़ों मिलियन डॉलर्स का खजाना उड़ा लिया है, जो वेनेजुएला या उसके लोगों की भलाई के लिए नहीं बल्कि अमेरिका के दादागीरी बढ़ाने में खर्च किया जाएगा। ट्रंप ने खजाना लूटने के बाद इसे खाड़ी देश में छिपा दिया है। मीडिया रिपोर्ट में अधिकारियों ने दावा किया है कि अमेरिका ने दक्षिण अमेरिकी देश के 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर के कच्चे तेल की बिक्री की थी। ये खजाना ट्रंप ने अमेरिका नहीं बल्कि एक दूसरे देश में शिफ्ट करने का फैसला किया। ट्रंप प्रशासन ने इस रकम को खाड़ी देश में जमा कराया है। वेनेजुएला के तेल से होने वाली कमाई को कतर के बैंक खाते में रखने का फैसला राजनीति चाल तो है ही लेकिन ट्रंप ने इसमें एक और खेल खेल दिया है। ये कदम केवल पैसा बचाने के लिए नहीं, बल्कि वेनेजुएला पर अमेरिकी कंट्रोल को पुख्ता करने और अमेरिकी डॉलर की वैश्विक बादशाहत को बचाने की रणनीति का हिस्सा है। वेनेजुएला पर अंतरराष्ट्रीय बॉन्डधारकों, तेल कंपनियों और अन्य कर्जदाताओं का करीब 170 बिलियन डॉलर यानी करीब 14 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। अगर यह पैसा अमेरिकी बैंकों में रखा जाता, तो ये कर्जदार कानूनी कार्रवाई के जरिए तुरंत उस पर कब्जा कर लेते। कतर को एक न्यूट्रल जगह मानी गई, जहां पैसा रखने से अमेरिकी अदालतों के आदेश सीधे लागू नहीं होते, जिससे यह फंड सुरक्षित रहता है और अमेरिका अपनी मर्जी से इसे इस्तेमाल कर सकता है। ये पैसा अमेरिका की इजाजत के बिना वेनेजुएला की सरकार नहीं छू पाएगी और पैसा तभी जारी होगा जब वेनेजुएला अमेरिकी शर्तों को मानेगा यानी पूरा कंट्रोल ट्रंप के हाथ में है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा ही सिस्टम अमेरिका ने इराक में भी बना रखा है। 2003 के बाद इराक के साथ भी अमेरिका ने यही किया था, जिसके बाद इराक का तेल बिकता है, लेकिन उसका पैसा न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व में जमा होता है। इराक को अपनी ही कमाई खर्च करने के लिए अमेरिका से इजाजत लेनी पड़ती है। 2024 में सऊदी अरब के साथ ‘तेल-के-बदले-डॉलर’ का समझौता खत्म होने के बाद डॉलर की स्थिति कमजोर हुई है। चीन, रूस और ब्रिक्स देश अपनी अलग करेंसी या स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की कोशिश कर रहे हैं। बता दें दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार लिए वेनेजुएला को डॉलर जोन में बांधे रखना अमेरिका के लिए जरूरी है। कतर के जरिए लेनदेन को नियंत्रित कर अमेरिका यह तय कर रहा है कि वेनेजुएला का तेल केवल डॉलर में ही बिके और वह ब्रिक्स के पाले में न जा सके। सिराज/ईएमएस 01 फरवरी 2026