01-Feb-2026
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लाहौर,(ईएमएस)। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हाल ही में संपन्न हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए), जिसे वैश्विक स्तर पर ‘मदर्स ऑफ ऑल डील’ कहा जा रहा है, ने पड़ोसी देश पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ा दी है। इस ऐतिहासिक समझौते के बाद जहां यूरोपीय संघ के सभी 27 देशों में व्यापारिक उत्साह देखा जा रहा है, वहीं पाकिस्तान के आर्थिक और औद्योगिक हलकों में घबराहट का माहौल है। पाकिस्तान के पूर्व फेडरल कॉमर्स मिनिस्टर गौहर एजाज ने इस डील को लेकर गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इसका सीधा और विनाशकारी असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और वहां के रोजगार पर पड़ने वाला है। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, लाहौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व मंत्री गौहर एजाज ने आगाह किया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ यह समझौता पाकिस्तान के औद्योगिक क्षेत्र, विशेष रूप से टेक्सटाइल (कपड़ा) इंडस्ट्री के लिए एक अस्तित्व का संकट बन सकता है। पाकिस्तान के लिए टेक्सटाइल सेक्टर उसके कुल निर्यात की रीढ़ माना जाता है और देश की विदेशी मुद्रा आय का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। एजाज ने आशंका जताई है कि यदि स्थिति को समय रहते नहीं संभाला गया, तो पाकिस्तान में लगभग एक करोड़ लोगों की रोजी-रोटी छिन सकती है। वर्तमान में पाकिस्तान का सालाना टेक्सटाइल निर्यात लगभग 9 बिलियन डॉलर का है। पूर्व मंत्री ने बताया कि पाकिस्तान को पहले यूरोपीय संघ में कुछ विशेष रियायतें और तरजीही व्यापार पहुंच का लाभ मिलता था, जिससे उसे भारतीय उत्पादों के मुकाबले बढ़त हासिल थी। हालांकि, भारत के साथ इस नए एफटीए के तहत अब वह विशेष लाभ खत्म हो जाएगा, क्योंकि भारत को भी अब जीरो-टैरिफ एक्सेस मिल जाएगा। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा कई गुना बढ़ जाएगी, जिसका मुकाबला करना पाकिस्तान के लिए नामुमकिन जैसा होगा। पाकिस्तान पहले से ही बढ़ती उत्पादन लागत, बिजली-गैस की भारी किल्लत और ऊंचे करों की मार झेल रहा है। ऐसी स्थिति में भारत के साथ यूरोपीय देशों का यह समझौता पाकिस्तानी उद्योगों की कमर तोड़ सकता है। एजाज का मानना है कि यदि सरकार ने तत्काल नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो देश के कई बड़े कारखाने और औद्योगिक इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगी, जिससे पूरे पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी फैलेगी। इस समझौते का असर केवल पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने बांग्लादेश की भी चिंता बढ़ा दी है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुई इस डील ने लेदर, फुटवियर, जेम्स एवं ज्वेलरी और टेक्सटाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए नई राहें खोल दी हैं। अब भारतीय निर्यातक बिना किसी आयात शुल्क के यूरोप के 27 देशों के विशाल बाजार में अपना माल बेच पाएंगे। भारत के लिए यह समझौता न केवल आर्थिक प्रगति का जरिया बनेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उसकी स्थिति को भी और अधिक मजबूत करेगा। वीरेंद्र/ईएमएस 01 फरवरी 2026