- फसल बर्बादी से किसान गहरे संकट में गुना (ईएमएस)। पूर्व कैबिनेट मंत्री और राघौगढ़ विधायक जयवर्द्धन सिंह ने गुना जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर जिले और राघौगढ़ विधानसभा के कई गांवों में किसानों को हुई भारी फसल क्षति का मुद्दा उठाया है। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में तेज हवाओं, अचानक हुई बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी फसलें तबाह हो गईं और किसान गहरे आर्थिक संकट में फंस गए हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि धनिया, गेहूं, चना, सरसों, मसूर के साथ-साथ सब्जी और बागवानी फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। जिन फसलों से किसान अपने परिवार का सालभर का सहारा देखते थे, वही फसलें आंखों के सामने बर्बाद हो गईं। कई किसानों के लिए यह नुकसान सिर्फ फसल का नहीं, बल्कि उम्मीद और भरोसे का भी है। विधायक ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में तुरंत राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम बनाकर फसल क्षति का सर्वे कराया जाए। साथ ही राज्य आपदा राहत कोष और फसल बीमा योजना के तहत जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए, ताकि टूट चुके किसानों को समय रहते राहत मिल सके और वे दोबारा हिम्मत जुटा सकें। गुना जिले का मौसम अगले दो-तीन दिनों तक अस्थिर लेकिन अत्यधिक गंभीर रहने के संकेत नहीं दे रहा है। वर्तमान में उत्तर-पूर्वी ईरान के ऊपर मध्य वायुमंडलीय स्तर पर एक पश्चिमी विक्षोभ के रूप में सक्रिय है। इसका सीधा केंद्र ईरान क्षेत्र में है, लेकिन इससे जुड़ी नमी और ऊपरी हवा की ट्रफ रेखा उत्तर भारत की ओर बढ़ रही है। इस सिस्टम का प्रभाव सबसे पहले जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और पंजाब क्षेत्र में दिखता है, जबकि मध्यप्रदेश तक इसका असर कमजोर रूप में पहुंचता है। ईरान से गुना की सीधी दूरी लगभग 2400 किलोमीटर से अधिक है, इसलिए यह सिस्टम यहां तीव्र वर्षा या ओलावृष्टि का कारण नहीं बन रहा, बल्कि केवल बादल, ठंडी हवा और हल्की नमी दे रहा है। इसके साथ ही उत्तर भारत के ऊपर जेट स्ट्रीम तेज गति से बह रही है। यह जेट स्ट्रीम आमतौर पर शीतकालीन पश्चिमी विक्षोभों को गति देती है। इसका अप्रत्यक्ष असर मध्यप्रदेश में तापमान को सामान्य से नीचे बनाए रखना और सुबह के समय कोहरा बढ़ाना होता है। इसी कारण गुना जिले में मध्यम कोहरे की स्थिति दर्ज की गई है। ग्वालियर, दतिया और मुरैना जैसे जिले, जो गुना से लगभग 120 से 180 किलोमीटर उत्तर में हैं, वहां घना कोहरा और शीतल दिन की स्थिति बनी हुई है। इन क्षेत्रों की ठंडी हवा बहकर गुना तक पहुंच रही है, जिससे रात और सुबह का तापमान कम बना हुआ है। दो फरवरी की रात से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने की संभावना जताई गई है। इसका मुख्य प्रभाव फिर से पहाड़ी राज्यों और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों तक सीमित रहने की उम्मीद है। राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों जैसे बीकानेर और जैसलमेर, जो गुना से लगभग 500 से 600 किलोमीटर दूर हैं, वहां हल्की बारिश या बादल बन सकते हैं। यदि वहां वर्षा होती है तो उसका कमजोर असर गुना में बादल और ठंडी हवा के रूप में दिख सकता है। पांच फरवरी के आसपास एक और पश्चिमी विक्षोभ के संकेत हैं, लेकिन वह भी अभी प्रारंभिक चरण में है और मध्यप्रदेश के लिए इसे मजबूत सिस्टम नहीं माना जा रहा। गुना जिले पर इन सभी सिस्टमों का संयुक्त प्रभाव यह रहेगा कि एक फरवरी को आसमान सामान्यत: बादलों से ढका रह सकता है और कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बन सकती है। दो फरवरी को आंशिक बादल रहेंगे और बहुत स्थानीय स्तर पर हल्की बारिश या गरज-चमक की स्थिति बन सकती है, लेकिन इसकी संभावना कम है। तापमान दिन में लगभग 21 से 23 डिग्री और रात में 11 से 13 डिग्री के आसपास रह सकता है। सुबह के समय कोहरा बने रहने की संभावना है, जिससे दृश्यता प्रभावित हो सकती है। ओलावृष्टि की संभावना की बात करें तो उपलब्ध आधिकारिक पूर्वानुमानों और सिनॉप्टिक स्थिति के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में गुना जिले में ओलावृष्टि के अनुकूल परिस्थितियां नहीं बन रही हैं। इसके लिए आमतौर पर तीव्र संवहनीय बादल, मजबूत निचली स्तर की नमी और तीव्र अपड्राफ्ट की जरूरत होती है, जो फिलहाल मौजूद नहीं हैं। हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना जरूर है, लेकिन वह भी व्यापक नहीं बल्कि छिटपुट रहेगी। - सीताराम नाटानी