जबलपुर (ईएमएस)। पीएमएलए कोर्ट के आदेश पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए करीब 45 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों की बहाली सुनिश्चित कराई है। यह कार्रवाई एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश इरशाद अहमद कि अदालत के आदेश पर मैसर्स जगदंबा एएमडब्ल्यू ऑटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक पुष्पेंद्र सिंह के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। जब्त संपत्तियां अब कैनरा बैंक के पक्ष में बहाल की गई हैं। मामले में सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विक्रम सिंह ने बताया कि ईडी के भोपाल जोनल कार्यालय की जांच में सामने आया कि जगदंबा एएमडब्ल्यू ऑटोमोटिव्स कंपनी और उसके निदेशक पुष्पेंद्र सिंह ने बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वाहन ऋण हासिल किए। कई मामलों में ऋण स्वीकृत होने के बावजूद वाहन की डिलीवरी ही नहीं की गई। इस तरह से प्राप्त धनराशि को आरोपी ने अपने अन्य व्यवसायों, परिवार के सदस्यों के खातों और निजी उपयोग में लगाया। इस मामले में सीबीआई, बैंक सिक्योरिटी एंड फ्रॉड सेल, नई दिल्ली द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 और आईपीसी की धारा 420 व 120बी के तहत केस दर्ज किया गया था। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि इस घोटाले से कैनरा बैंक, जबलपुर को लगभग 18.32 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ, जबकि ब्याज अलग है। कैनरा बैंक जबलपुर की शिकायत पर ईडी द्वारा की गई जांच के अनुसार अपराध से अर्जित धन भी 18.32 करोड़ रुपये आंका गया। प्रकरण में ईडी ने पहले ही 5.32 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था, जिसे बाद में अधिनिर्णायक प्राधिकरण ने पुष्टि प्रदान की। इसके बाद 13 मार्च 2024 को अभियोजन शिकायत दायर की गई और विशेष पीएमएलए कोर्ट, जबलपुर ने मामले में संज्ञान लेते हुए आरोप तय किए। कैनरा बैंक ने धारा 8(8), पीएमएलए के तहत कुर्क संपत्तियों की बहाली के लिए आवेदन किया था। सभी पक्षों को सुनने के बाद 29 जनवरी 2026 को पीएमएलए कोर्ट, जबलपुर के वशेष न्यायाधीश इरशाद अहमद की अदालत ने आदेश पारित करते हुए वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 45 करोड़ रुपये की संपत्तियों को पीड़ित बैंक के पक्ष में बहाल करने का निर्देश दिया। अजय पाठक / मोनिका / 02 फरवरी 2026/ 03.17