राज्यसभा में फर्जी जाति प्रमाण पत्रों का मुद्दा उठाया, डॉ. सोलंकी ने कहा भोपाल (ईएमएस)। राज्यसभा में सोमवार को भाजपा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के मुद्दे पर सरकार का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि गलत तरीके से बनवाए गए ये कागज अनुसूचित जाति और जनजाति समाज के असली हकदारों का अधिकार छीन रहे हैं। डॉ. सोलंकी ने इस समस्या को पूरे देश के लिए एक गंभीर खतरा बताते हुए सरकार से दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। डॉ. सोलंकी ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि संविधान ने पिछड़ों और दलितों को बराबरी पर लाने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की है। लेकिन कुछ लोग स्वार्थ के लिए फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर इस पवित्र व्यवस्था को चोट पहुंचा रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षा और सरकारी नौकरियों में जाली दस्तावेजों के सहारे अयोग्य लोग कुर्सियों पर काबिज हो रहे हैं। इसका सीधा असर उन गरीब और काबिल छात्रों पर पड़ रहा है, जिनके लिए यह व्यवस्था बनाई गई थी। मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में बुरा हाल अपने गृह राज्य मध्य प्रदेश का जिक्र करते हुए सांसद ने बताया कि वहां जाली प्रमाण पत्रों से नौकरी पाने के 232 मामलों की जांच चल रही है, जबकि 8000 से ज्यादा मामले पिछले 20 सालों से समितियों के पास अटके हुए हैं। उन्होंने राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों का नाम लेते हुए कहा कि यह समस्या हर जगह फैली हुई है। सांसद ने सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी को भी दोहराया जिसमें कहा गया है कि फर्जी दस्तावेज पर मिली नौकरी या दाखिला कभी मान्य नहीं होगा और ऐसे लोगों को तुरंत काम से हटाकर जेल भेजना चाहिए। आरक्षण कृपा नहीं, संवैधानिक अधिकार है डॉ. सोलंकी ने जोर देकर कहा कि आरक्षण किसी की मेहरबानी नहीं, बल्कि एक संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे देश में जाति प्रमाण पत्रों की जांच के लिए एक सख्त और असरदार व्यवस्था बनाई जाए। उन्होंने कहा कि जब तक दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिलेगी, तब तक असली पात्र लोगों को उनका हक नहीं मिल पाएगा। इस अधिकार की रक्षा करना पूरे सदन और देश की सामूहिक जिम्मेदारी है। विनोद/ 2 फरवरी /2026