राज्य
02-Feb-2026


जांचकर्ता अधिकारियों की भूमिका पर भी उठने लगे सवाल जबलपुर (ईएमएस)। जिले में धान उपार्जन का काम 12 दिन पूर्व 30 जनरी को ही खत्म हो चुका है। इस बार 55 हजार किसानों में से करीब 50 हजार 662 किसानों ने सरकारी को 37 लाख क्विंटल से अधिक धान बेची परंतु इसमें कुछ सोसायटी और समूह ऐसे भी रहे, जिनमें किसान बनकर फर्जी लोगों ने धान बेचा और सरकार से भुगतान भी ले लिया। इतना ही नहीं कई सोसाइटी और समूह में ऐसे किसानों ने पंजीयन कराया, जो उनकी तहसील से कोसों दूर थीं। यहां किसानों ने गुणवत्ताहीन माल बेचा और व्यापारियों ने पुराना माल बेचा। इसमें मझौली के वृहताकार सेवा सहकारी समिति ऐसी रही जहां पर शहपुरा, पनागर, जबलपुर, पाटन समेत कई तहसील के किसानों ने जिला प्रशासन की तमाम सख्ती के बाद भी आसानी से पंजीयन करा लिया और अपनी अघोषित धान को बेच भी लिया। हालांकि उक्त मामले में सोसाइटी के प्रभारी प्रबंधक और कंप्यूटर आपरेटर पर एफआईआर हुई है, लेकिन अभी तक सभी किसानों की जांच नहीं हुई। लिहाजा जांच कता अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल उठने के और भी कई कारण हैं जैसे ‎दो दिन पूर्व उपार्जन समिति ने कुंडम के गुरुनानक वेयरहाउस में प्रबंधक की एफआईआर हुई, लेकिन इस मामले में वृहताकार सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। नियमानुसार किसानों का सत्यापन, प्रबंधक के बिना सत्यापन के नहीं होता है और खरीदी भी नहीं चढ़ाई जा सकती, किंतु इस सोसाइटी में भी प्रबंधन ने यह दोनों जिम्मेदारी संभाली, लेकिन इसमें हुए फर्जीवाड़े से उसे अभी तक दूर ही रखा है। वहीं इस प्रकरण की जांच में कई ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं, जिसमें जिम्मेदार अधिकारियों को भूमिकाएं संदिग्ध मिली हैं। हालांकि इस प्रकरण के साथ ही अब उन सोसाइटियों में भी जांच धीमी चलने और कार्रवाई न होने पर सवाल खड़े हो गए हैं, जिन्हें नोटिस दिया था। अजय पाठक / मोनिका / 02 फरवरी 2026/ 03.18