राष्ट्रीय
04-Feb-2026
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- न तो ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मिल रहा है और न ही समय पर इलाज हापुड़,(ईएमएस)। एक तरफ जहां सरकार गांव-गांव स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के 50 से ज्यादा गांवों में लोग आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि जलजनित बीमारियों के कारण हर साल दर्जनों लोग काल के गाल में समा रहे हैं। न तो ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मिल रहा है और न ही समय पर इलाज, जिससे यह संकट और गहराता जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता का भारी अभाव है। बीमार पड़ने पर जब तक मरीज शहर या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचता हैं, तब तक उनकी हालत बिगड़ चुकी होती है। पिछले दो सालों से जिले में बुखार का प्रकोप तेजी से फैला है। गढ़मुक्तेश्वर तहसील क्षेत्र, खासकर गंगा तट के गांवों में सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गई थीं, हालांकि यहां डेंगू के मरीज अपेक्षाकृत कम पाए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गढ़ क्षेत्र के शेरा कृष्णा वाली लठीरा, मढ़ैया, काकाठेर की मढ़ैया, नयाबांस, गढ़ावली, आरकपुर समेत कई गांवों का दौरा किया। जांच में सामने आया कि ज्यादातर मौतें जलजनित रोगों के कारण हुई हैं। सबसे ज्यादा मरीजों में टाइफाइड पाया गया, जो दूषित पेयजल से फैलने वाला गंभीर बुखार है। इसके बाद जिला प्रशासन ने हर घर शुद्ध पेयजल पहुंचाने का दावा किया और ‘हर घर जल’ अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी हकीकत में हालात जस के तस बने हुए हैं। हालिया जांच में स्वास्थ्य विभाग ने पाया कि ग्रामीणों में टाइफाइड, हेपेटाइटिस और चर्म रोग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कई गांवों में लोग केवल 20 फीट गहराई से निकले दूषित पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक गढ़मुक्तेश्वर, सिंभावली, धौलाना, पिलखुआ, हाफिजपुर और ब्रजघाट क्षेत्रों में भूगर्भ जल अत्यधिक दूषित हो चुका है। जानकारों का कहना है कि लंबे समय तक ऐसा पानी पीने से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीणों ने बताया कि गांवों में पानी का टीडीएस स्तर 1500 के पार पहुंच चुका है, जबकि 500 से कम टीडीएस वाला पानी ही पीने योग्य माना जाता है। दूषित पानी के कारण हेपेटाइटिस सी, कैंसर, एलर्जी, डायरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियां फैल रही हैं। कई परिवारों को इलाज के लिए जमीन तक बेचनी पड़ी है। स्वास्थ्य विभाग के डीएमओ ने बताया कि कई गांवों में जांच कर दूषित पानी से होने वाली बीमारियों की पुष्टि हुई है। पानी की गुणवत्ता परखी जा रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने के साथ स्वच्छ पेयजल के प्रति जागरूकता फैलाने की योजना तैयार की जा रही है। सिराज/ईएमएस 04 फरवरी 2026