वॉशिंगटन,(ईएमएस)। वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले उत्पादों पर लगने वाले भारी-भरकम 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर अब सीधे 18 प्रतिशत कर दिया है। इस ऐतिहासिक फैसले का सीधा अर्थ यह है कि अब अमेरिकी बाजारों में भारतीय सामान पहले की तुलना में काफी सस्ते और प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खुल गए हैं। इस कटौती के बाद भारत अपने दक्षिण एशियाई पड़ोसियों और अन्य प्रमुख एशियाई निर्यातक देशों की तुलना में काफी लाभप्रद स्थिति में आ गया है। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो पाकिस्तान को वर्तमान में अमेरिकी निर्यात पर 19 प्रतिशत टैरिफ देना पड़ रहा है, जबकि बांग्लादेश और श्रीलंका के लिए यह दर 20 प्रतिशत पर टिकी हुई है। हालांकि अफगानिस्तान के लिए यह दर 15 प्रतिशत है, लेकिन उसकी सीमित उत्पादन क्षमता के कारण भारत को वहां से किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है। दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों जैसे वियतनाम (20 प्रतिशत), इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड (सभी 19 प्रतिशत) के मुकाबले भी भारत अब बढ़त बनाने में सफल रहा है। यह महत्वपूर्ण बदलाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच 2 फरवरी को हुई एक उच्च स्तरीय फोन कॉल के बाद देखने को मिला है। इस बातचीत के तुरंत बाद ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका भारत पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर रहा है। इसके बदले में भारत भी अमेरिकी उत्पादों पर लगने वाली अपनी टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने पर सहमत हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे भारतीय विनिर्माण क्षेत्र और मेड इन इंडिया उत्पादों के लिए एक क्रांतिकारी कदम बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का सबसे गहरा असर चीन और भारत के पड़ोसी देशों पर पड़ेगा। चीन से अमेरिका जाने वाले सामानों पर फिलहाल 34 प्रतिशत का भारी टैरिफ लागू है, जो भारत की नई दर के मुकाबले लगभग दोगुना है। ऐसे में वैश्विक कंपनियां अब चीन के विकल्प के रूप में भारत को अधिक प्राथमिकता दे सकती हैं। दूसरी ओर, पहले से ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे पाकिस्तान और बांग्लादेश के लिए यह दोहरी मार जैसा है। यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते के बाद अब अमेरिका में भारत को मिली यह रियायत इन देशों के कपड़ा और अन्य प्रमुख निर्यात उद्योगों के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकती है, जिससे वहां रोजगार के अवसरों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। वीरेंद्र/ईएमएस 04 फरवरी 2026