अंतर्राष्ट्रीय
04-Feb-2026
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बीजिंग (ईएमएस)। पाकिस्तान में लगातार गिरते सुरक्षा स्तर और गहराते राजनीतिक संकट ने चीन की सबसे महत्वाकांक्षी वैश्विक परियोजना चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। एक अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग अब पाकिस्तान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों और अरबों डॉलर के निवेश पर गंभीरता से पुनर्विचार कर रहा है। रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि इस्लामाबाद चीनी नागरिकों और संपत्तियों को पुख्ता सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहता है, तो चीन इस परियोजना से अपने हाथ खींच सकता है। मौजूदा हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस ग्वादर बंदरगाह को चीन अपनी अर्थव्यवस्था के लिए अरब सागर का प्रवेश द्वार मानता था, आज वहां सुरक्षा की स्थिति बेहद नाजुक है। साल 2024 के अंत में सुरक्षा कारणों से ही ग्वादर हवाई अड्डे का उद्घाटन भौतिक रूप से न करके ऑनलाइन माध्यम से करना पड़ा था, क्योंकि चीनी वरिष्ठ अधिकारियों के लिए वहां जाना सुरक्षित नहीं समझा गया। बलूचिस्तान में सक्रिय बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों ने सीपेक की प्रगति को पूरी तरह से बाधित कर दिया है। लगभग एक दशक पहले चीन ने अपनी पश्चिमी सीमाओं को सुरक्षित करने और ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक मार्ग के रूप में पाकिस्तान पर 62 अरब डॉलर का भारी-भरकम दांव लगाया था। चीन को उम्मीद थी कि इस निवेश से उसे हिंद महासागर तक सीधी और सुरक्षित पहुंच मिलेगी, लेकिन वर्तमान में यह दांव उल्टा पड़ता नजर आ रहा है। पाकिस्तान की आंतरिक उथल-पुथल, आर्थिक बदहाली और उग्रवादी संगठनों के बढ़ते प्रभाव के कारण अधिकांश प्रोजेक्ट या तो ठप पड़े हैं या बेहद धीमी गति से चल रहे हैं। करोड़ों डॉलर का इंफ्रास्ट्रक्चर अब धूल फांकने को मजबूर है, जिससे चीन को अपने निवेश पर मिलने वाले रिटर्न की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। संकट केवल बलूचिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि खैबर पख्तूनख्वा और पश्चिमी सीमाएं भी हिंसा की चपेट में हैं। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) द्वारा चीनी परियोजनाओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, अफगान तालिबान के साथ पाकिस्तान के बिगड़ते रिश्तों ने क्षेत्रीय स्थिरता के चीनी सपने को चकनाचूर कर दिया है। सीमा पर लगातार होने वाली झड़पों और मिसाइल हमलों ने व्यापारिक मार्गों को असुरक्षित बना दिया है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो पाकिस्तान के लिए चीन जैसा भरोसेमंद सहयोगी और उसका भारी निवेश बचा पाना नामुमकिन हो जाएगा। वीरेंद्र/ईएमएस 04 फरवरी 2026