राष्ट्रीय
04-Feb-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा के बीच मानहानि विवाद आपसी सहमति से सुलझ गया है। कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील तन्खा की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि वे शिवराज के खिलाफ दायर आपराधिक और सिविल मानहानि के मामलों को वापस ले रहे हैं। जस्टिस एमएम सुंदरैश व जस्टिस एनके सिंह की पीठ को सीनियर वकील महेश जेठमलानी ने इसकी जानकारी दी। दरअसल, 2021 में मप्र पंचायत चुनावों के दौरान भाजपा के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सांसद तन्खा पर ओबीसी आरक्षण का विरोध करने का बयान दिया था। इसके खिलाफ सांसद तन्खा ने सेशन कोर्ट में सिविल और आपराधिक मानहानि का दावा का 10 करोड़ मुआवजे और तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान, तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा व पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सेशन कोर्ट ने तीनों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए। भाजपा नेताओं ने हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन राहत नहीं मिली, तब मामला 2024 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 11 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने वारंटों पर रोक लगाकर तन्खा से जवाब मांगा। भाजपा का तर्क है कि बयान विधानसभा के भीतर दिए गए थे और संविधान के अनुच्छेद 194(2) के तहत संरक्षित हैं। तन्खा की ओर से कपिल सिब्बल और सुमीर सोढ़ी ने पैरवी की। जेठमलानी ने बताया कि दोनों नेताओं ने संसद में मुलाकात के बाद आपसी सहमति से विवाद हल करने का फैसला किया है। मामले को सुलह से समाधान तक ले जाने में वरिष्ठ वकील सिब्बल ने अहम भूमिका निभाई है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट नए मामले का निपटारा किया। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की सराहना कर कहा कि राजनीतिक बयानों से जुड़े मामलों में अदालतों को बेहद सावधानी से कदम रखना चाहिए। आशीष दुबे / 04 फरवरी 2026