ढाका (ईएमएस)। बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से पहले राजनीतिक बयानबाज़ी तेज है। शेख हसीना सरकार के पतन के 18 महीने बाद हो रहे चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को सत्ता का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है। पार्टी की कमान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के हाथों में है। बीएनपी की सेंट्रल कमेटी के सदस्य और इंटरनेशनल सेल के प्रमुख अब्दुल मोइन खान ने भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि “जिस देश ने शेख हसीना को पनाह दे रखी है, वह दोस्त कैसे हो सकता है।” उनके अनुसार, बांग्लादेश की विदेश नीति स्पष्ट हैं, दोस्ती सभी से, दुश्मनी किसी से नहीं।” उन्होंने कहा कि भारत के साथ भी बीएनपी यही नीति अपनाएगी, लेकिन किसी देश को विशेष प्राथमिकता नहीं दी जा सकती। बीएनपी नेता खान ने दावा किया कि अंतरिम सरकार की विदेश नीति, खासतौर पर भारत के साथ बिगड़ते रिश्तों को लेकर आम लोग असंतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि दो देशों के रिश्ते केवल सरकारों तक सीमित नहीं होते, बल्कि जनता के बीच भरोसे पर टिके होते हैं। उनके मुताबिक भारत ने अवामी लीग और शेख हसीना पर जरूरत से ज्यादा भरोसा किया और बांग्लादेश के आम लोगों की भावनाओं को समझने में चूक की। शेख हसीना के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में उनके कार्यकाल के खिलाफ जनता का गुस्सा फूटा, जिसके बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ा। बांग्लादेश की अदालत ने उन्हें सजा सुनाई है और मौजूदा सरकार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रही है। इसतरह भारत द्वारा उन्हें शरण देना द्विपक्षीय संबंधों को और जटिल बना रहा है। बीएनपी नेता ने कहा कि पार्टी भारत सहित सभी देशों से बराबरी और सम्मान पर आधारित रिश्ते चाहती है तथा दक्षिण एशिया को एक मजबूत क्षेत्रीय शक्ति के रूप में देखना चाहती है। उन्होंने अफसोस जताया कि सार्क जैसी क्षेत्रीय संस्था निष्क्रिय पड़ी है, जबकि यह पूरे दक्षिण एशिया के लिए एक साझा मंच बन सकती थी। आशीष दुबे / 04 फरवरी 2026