लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर विपक्ष का हंगामा...सत्तापक्ष और विपक्ष में आर-पार की लड़ाई बोलने नहीं दिया...तो बोलने नहीं देंगे -संसद में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के ऑफिस में विपक्ष और भाजपा सांसदों के बीच बहस नई दिल्ली(ईएमएस)। विपक्षी सांसदों के लगातार हंगामे के चलते बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही 4 बार स्थगित हुई, जिसके बाद शाम 5 बजे सदन को गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। हंगामे के कारण पीएम नरेंद्र मोदी का बुधवार शाम 5 बजे होने वाले राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर संबोधन भी टल गया। संसद में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के ऑफिस में विपक्ष और भाजपा सांसदों के बीच भी बहस हुई है। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। सत्तापक्ष और विपक्ष में आर-पार की लड़ाई देखी जा रही है। विपक्ष ने हंगामा करके संकेत दे दिया है कि बोलने नहीं दिया तो बोलने नहीं देंगे। बजट सत्र के दौरान सदन में पक्ष-विपक्ष के बीच जोरदार तकरार देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां राहुल गांधी अपने चीन सीमा विवाद वाले मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं, वहीं सरकार की तरफ से इसका जवाब दिया जा रहा है। इसी बीच एक दिन पहले भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर भी विपक्ष सरकार पर निशाना साथ साध रहा है। एक दिन पहले भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस किया गया और आज वे लोकसभा में भी इस मुद्दे पर बोलने के लिए खड़े हुए। उनके भाषण के दौरान विपक्षी सांसदों ने टेबल पीटकर और हंगामा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान विपक्ष ने राहुल गांधी को बोलने देने के लिए नारेबाजी की और वेल में भी आ गए। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा- बालू जी, आप वरिष्ठ नेता है, ये आपको अच्छा लग रहा है? विपक्षी सांसद पोस्टर लेकर पहुंचे। इस दौरान स्पीकर ने कहा - विपक्षी सांसद मर्यादा तोड़ रहे हैं। आप शासन को झुका नहीं सकते। विरोध तर्कों से होता है। अहमति मुद्दों पर होती है। ये हंगामा करना ठीक नहीं है। बुधवार को फिर चेयर की तरफ विपक्षी सांसदों ने पेपर उड़ाए। विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। सुबह सदन सिर्फ 5 मिनट चला और 12 बजे तक स्थगित हुआ। इसके बाद 12 बजे हंगामा होने पर दोपहर 2 बजे तक और 2 बजे दोबारा शुरू होकर 8 मिनट में ही रुक गया। शाम 5 बजे फिर शुरू होने के बाद भी हंगामे के चलते लोकसभा को कल सुबह 11 बजे तक स्थगित करना पड़ा। किताब पर वार आर्मी चीफ एमएम नरवणे की जिस किताब को लेकर संसद में दो दिन से हंगामा हो रहा है। राहुल गांधी बुधवार को वही किताब लेकर संसद पहुंचे। उन्होंने कहा कि अगर आज पीएम आए तो उन्हें यह किताब दूंगा। राहुल ने किताब का वह पेज खोलकर दिखाया, जिसमें लिखा है कि प्रधानमंत्री ने आर्मी चीफ से कहा था- जो उचित समझो वह करो!। राहुल ने कहा कि सरकार और रक्षा मंत्री कह रहे है कि किताब का अस्तित्व नहीं है। देखिए यह रही किताब। राहुल ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री आते हैं तो मैं खुद जाकर उन्हें यह किताब सौंपूंगा, ताकि वे इसे पढ़ सकें और देश को इसके बारे में पता चल सके। वहीं, लोकसभा में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने गांधी परिवार और कांग्रेस पर लिखी किताबें और नोट्स दिखाए। उन्होंने कहा इन किताबों में गांधी परिवार और कांग्रेस परिवार की मक्कारी, गद्दारी, भ्रष्टाचार और अय्याशी का जिक्र है। निशिकांत की कोट की गई किताबों में एडविना एंड नेहरू, रेमिनिसेंस ऑफ द नेहरू एज, द रेड साड़ी, एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर समेत दूसरी किताबें और नोट्स दिखाए। मकर द्वार पर सस्पेंड सांसदों का विरोध प्रदर्शन लोकसभा से निलंबित विपक्ष के 8 सांसदों ने पोस्टर लेकर विरोध जताया। पोस्टर पर लिखा- पीएम इज कॉम्प्रोमाइज्ड (प्रधानमंत्री ने समझौता किया)। पोस्टर पर पूर्व आर्मी चीफ नरवणे, पीएम नरेंद्र मोदी और जेफ्री एपस्टीन की तस्वीर थी। इन सांसदों को चेयर की तरफ पेपर उछालने की शिकायत पर पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित किया गया है। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर विपक्ष ने हंगामा किया। भाजपा लिए महिलाएं केवल वोट बैंक: खडग़े राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बुधवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़ेे ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, 6062 शब्दों को अभिभाषण इस सरकार ने तैयार किया है। लेकिन कई अहम सवालों पर अभिभाषण मौन है। मैं सदन में सिर्फ पांच जरूरी मुद्दे आपके सामने रखना चाहूंगा। मैं सामाजिक न्याय, सामाजिक सद्भाव, संसदीय लोकतंत्र पर हमला, अर्थव्यवस्था और किसानों मजदूरों की दिक्कतें और विदेश नीति की खामियां.. पर अपनी बात रखना चाहता हूं। खडग़ेे ने कहा, आपको यह बताना चाहता हूं कि इस सत्ता ने कितना समय देश की भलाई के लिए दिया है। कितना समय इन्होंने देश के बाहर बिताया। यह आप सबको मालूम है। सबसे पहले मैं सामाजिक न्याय पर बात रखूंगा। पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने सामाजिक न्याय के ताने-बाने को कमजोर किया है। उनके सांविधानिक हक-हकूकों पर चोट पहुंचाई है। राष्ट्रपति के अभिभाषण में महिला सशक्तिकरण पर बात हुई, लेकिन सच यह है कि महिलाएं भाजपा के लिए केवल वोट बैंक बनकर रह गई हैं। अगर मोदी वाकई महिलाओं का नेतृत्व आगे लाना चाहते हैं, तो सबसे महिला आरक्षण विधेयक पारित करते, इस पर शर्तें नहीं रखते। अगर आपको उन्हें शक्ति देनी है, तो आप ये विधेयक पास कर सकते हैं। उसको लागू कर सकते हैं। आप कहते हैं कुछ, करते हैं कुछ। विनोद उपाध्याय / 04 फरवरी, 2026